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2 जून, 2020|4:24|IST

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प्रोत्साहन पैकेज को लेकर उद्योग, विश्लेषकों के बीच मतभेद

प्रोत्साहन पैकेज को लेकर उद्योग, विश्लेषकों के बीच मतभेद

बजट का दिन जैसे-जैसे करीब आ रहा है उद्योग, विश्लेषक और सरकारी परामर्शकों के बीच प्रोत्साहन वापस लेने के मुद्दे पर मतभेद और तीखे हो रहे हैं।
   
दिसंबर महीने के औद्योगिक विकास के चौंकाने वाले आंकड़े और चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि के सात फीसदी से अधिक रहने के सीएसओ के अनुमान के मद्देनजर विश्लेषक और सरकारी सलाहकार प्रोत्साहन पैकेज की चरणबद्ध वापसी की मांग कर रहे हैं।
  
हालांकि उद्योग का कहना है कि सुधार अभी कुछ बड़े क्षेत्रों तक सीमित है और सरकार को प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की जल्दी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह आर्थिक वृद्धि और रोजगार दोनों के लिए खतरनाक होगा। औद्योगिक उत्पादन दिसंबर 2009 के दौरान 16 साल के उच्चतम स्तर 16.8 फीसदी पर पहुंच गया, जिससे सरकार के प्रोत्साहन पैकेज का फायदा नजर आ रहा है।
   
हालांकि इसी प्रोत्साहन पैकेज से पिछले वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.2 फीसदी हो गया जबकि बजट में 2.5 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया गया था। चालू वित्त वर्ष के दौरान यह
6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। प्रोत्साहन पैकेज में शुल्कों में कटौती और योजना व्यय में बढ़ोतरी शामिल है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने कहा कि औद्योगिक वृद्धि के बेहतर आंकड़े के मद्देनजर प्रोत्साहन पैकेज की वापसी के जरिए राजकोषीय घाटे को कम करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
   
बजट में प्रोत्साहन पैकेज की वापसी के प्रति आगाह करते हुए फिक्की के महासचिव अमित मित्र ने कहा कि  खाद्य उत्पाद, सूती कपड़े, चमड़ा और विभिन्न विनिर्माण खंड जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र वद्धि के लिहाज से अभी पिछड़े हैं।  प्रोत्साहन पैकेज की वापसी आर्थिक वृद्धि और रोजगार दोनों लिहाज से खतरनाक होगा।
  
प्रोत्साहन पैकेज की वापसी का मतलब होगा उत्पाद शुल्क या सेवा कर में बढ़ोतरी या फिर योजना व्यय में कटौती। मित्र ने कहा कि अगर कर की दर बढ़ाई जाती है तो कीमत पर दबाव बढ़ेगा जो पहले ही बढ़ी हुई है।
  
ऐसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पीरामल ने कहा कि आईआईपी के आंकड़ों से स्पष्ट है कि अगले कुछ महीनों में सुधार की प्रक्रिया और तेज होगी और यह बरकरार रहेगी बशर्ते अगले वित्त वर्ष तक प्रोत्साहन पैकेज जारी रहे।

सीएसओ के आर्थिक वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहने के अनुमान के बाद योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी प्रोत्साहन पैकेज की चरणबद्ध वापसी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हमें यह कहना चाहिए कि प्रोत्साहन पैकेज सफल रहा है और हमें इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करना शुरू करना चाहिए। अगले साल राजकोषीय घाटा इस साल से कम रहेगा।
   
हालांकि कल के औद्योगिक वृद्धि के आंकड़े के बाद जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो अहलूवालिया ने इस सवाल को यह कहते हुए टाल दिया कि हमें इस रहस्य को बरकरार रखना चाहिए।
  
एचडीएफसी की अर्थशास्त्री ज्योतिंदर कौर ने भी कहा कि मुझे कुछ कर कटौती की वापसी की उम्मीद है।

सीएसओ के आंकड़े के जारी होने के बाद वैश्विक इकाई मूडीज और बाक्र्लेज कैपिटल ने भी उम्मीद जताई कि सरकार आंशिक तौर पर प्रोत्साहन पैकेज वापस लेगी।

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  • Web Title:प्रोत्साहन पैकेज पर उद्योग-विश्लेषकों के बीच मतभेद