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मंदी का असर, भारत की संवृद्धि दर गिरी

विश्वव्यापी आर्थिक मंदी का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर वर्ष की तीसरी तिमाही में साफ दिखाई दिया। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में आई गिरावट के चलते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत रह गई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह वृद्धि 8.प्रतिशत रही थी। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसआे) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1000 के स्थिर मूल्यों पर वर्ष की तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर 2008’ के दौरान सकल घरेलू उत्पाद का मूल्य 8,73,426 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 8,2रोड़ रुपये रही थी। यह वृद्धि 5.3 प्रतिशत रही। जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक तीसरी तिमाही में सबसे यादा वृद्धि सामुदायिक, सामाजिक और व्यक्ितगत सेवाआें के क्षेत्र में 17.3 प्रतिशत की रही। इसके बाद वित्तीय सेवाआें (बीमा), अचल संपत्ति, बस सेवाआें के क्षेत्र में प्रतिशत, व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जीडीपी वृद्धि में अहम भूमिका निभाने वाले कृषि, वानिकी और मछली पालन क्षेत्र में इस दौरान 2.2 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र में 0.2 प्रतिशत की गिरावट रही। खान एवं खनन क्षेत्र में 5.3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन ने अपने चालू वित्त वर्ष 2008-0में 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अग्रिम अनुमान लगाया है। फिलहाल वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में जीडीपी वृद्धि 6.प्रतिशत रही है, जबकि वर्ष 2007-08 की इसी अवधि में प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की गई थी।

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