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ट्विंकल-ट्िंवकल पिंकी स्टार..

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के महाकुंभ से स्वदेश लौटी पिंकी शुक्रवार को किसी स्टार से कम नहीं थी। स्टिल और वीडियो कैमरों की कतार उसके सामने थी। न्यूज चैनलों के माइक उसकी आवाज रिकार्ड करना चाहते थे। ऑस्कर पुरस्कार समारोह से लौटने पर शुक्रवार को मीडिया ने सात साल की इस बच्ची को घंटों घेर रखा। फ्लैश चमकते रहे, वीडियो कैमर ऑन रहे, इसी बीच पिंकी थक कर सो गई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी उसे मिलने के लिए बुलाया, लेकिन बीमार होने के कारण वह मिल नहीं पाए। हालांकि उनकी ओर से पिंकी को एक सुंदर कलाई घड़ी दी गई। पिंका, जी हां पिंकी का यही नाम उसके गांव वाले जानते हैं और पुकारते हैं। मिर्जापुर के अहिरौरा थाना क्षेत्र स्थित ढबहीं की पिंकी से भोजपुरी में बात करने पर उसने मुस्कराकर कुछ-कुछ बोला। मंच पर लगा माइक पकड़कर बोली ‘द हम बोली..’। इसके बाद वह चुप हो गई। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित प्रेस मीट समाप्त होने के बाद पिंकी और उसके पिता से विशेष बातचीत की गई। इतने बड़े फिल्म पुरस्कार समारोह से लौटी ऑस्कर बेबी बस एक ही गाना गाती है, वह भी भोजपुरी ‘निरहुआ रिक्शावाला..’। उसके पिता ने बताया कि घर पर बिजली नहीं है, टीवी नहीं है। इस कारण बच्चों ने कभी सिनेमा नहीं देखा। राजेन्द्र ने कहा कि बिटिया के नसीब से विदेश घूम आए। घर पर सरकारी हैंडपंप लगा और कमरा मिल गया। अब तो सरकार से मांग है कि गांव में स्कूल बन जाए तो सभी बच्चों को पढ़ाई हो जाए। प्रेस वार्ता में स्माइल ट्रेन से जुड़े सतीश कॉलरा और डा. सुबोध कुमार सिंह मौजूद रहे। ऑस्कर पाने वाली शॉर्ट डाक्युमेंट्री ‘स्माइल पिंकी’ में ढबहीं की पिंकी के कटे होंठ ठीक होने की कहानी दिखाई गई है। स्माइल ट्रेन संस्था किस तरह से बच्चों का मुफ्त इलाज करती है, डाक्युमेंट्री की विषयवस्तु यही है। भले ही यह ट्रॉफी विदेशी निर्माता मेगन मेलन को मिली, पर डाक्युमेंट्री में शामिल पिंकी दुनियाभर में चर्चित हो गई। गांव की यह बच्ची और उसके पिता लास एंजिल्स तक पहुंच गए।

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