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राजनीति में हाशिए पर हैं छात्र नेता

जिस राज्य की राजनीति के शिखर पर छात्र आंदोलन से उपजे नेता विराजमान हो उस राज्य की राजनीति में आज छात्र नेताओं की भागीदारी हाशिए पर है। राज्य में हाल के वर्षो में न तो कोई छात्र आंदोलन हुआ और न ही सत्ता में छात्रों की भागीदारी मिली। वो चाहे लोक सभा का चुनाव हो या विधान सभा का। सभी चुनावों में छात्र नेताओं का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य है। सभी राजनीतिक दल छात्रों और युवाओं की भागीदारी की बात तो जरूर करते हैं लेकिन हकीकत कुछ और है। जे. पी. आंदोलन से उपजे नेता नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, नरन्द्र सिंह, अनिल कुमार शर्मा, रामविलास पासवान, अश्विनी कुमार चौबे समेत कई राजनेताओं को सत्ता में भागीदारी मिली। लेकिन नई पीढ़ी के छात्र नेता सत्ता और विपक्ष में कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं।ड्ढr ड्ढr बिहार में लोक सभा की 40 सीटों में इस बार कितनी सीटों पर छात्र नेताओं को टिकट मिलेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। अस्सी के दशक के पूर्वाद्ध तक पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की चर्चा तो पूर देश में होती थी। पटना विश्वविद्यालय छात्र संगठन को राज्य के छात्र आंदोलन की धुरी माना जाता था। 1े बाद तो राज्य में छात्र संघ का चुनाव हुआ ही नहीं। राज्य सरकार बार-बार छात्र संगठन चुनाव की बात तो करती है लेकिन आज तक किसी भी विश्वविद्यालय में संगठन का चुनाव नहीं हो सका। हालांकि बीच में 2001-02 में तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव हुए थे लेकिन वह प्रयोग भी विफल ही रहा।ं

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