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झंझारपुर: बाढ़-सुखाड़ के स्थायी निदान पर मांगेंगे जवाब

संसदीय चुनाव विधानसभा चुनावों से भिन्न होता है। लोकसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों के ऊपर राष्ट्रीय मुद्दा हावी रहता है। लेकिन मतदाताओं का एक बड़ा तबका चुनावों में ‘अपनी बातें’ रखने का एक मौका समझते हैं। रमेश सिंह का मानना है कि झंझारपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में बाढ़ एवं सुखाड़ का स्थायी निदान का मुद्दा चुनावी मुद्दा बन सकता है। संजीव सहनी का कहना है कि इस संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का अधिकांश इलाका पिछड़ा है। लोग इसी मसले पर नेताओं से जबाव मांगेंगे।ड्ढr ड्ढr इन पिछड़े इलाकों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। लोगों को अब तक आर्सेनिक मुक्त पेय जल उपलब्ध नहीं कराना भी चुनावी मुद्दा बन सकता है। हरकृष्ण साहु कहते हैं कि इलाके की पुरानी चीनी मिलें बंद है। कई नदियों में पुल नहीं बना है। यह तमाम मुद्दे भी चुनावी मुद्दा बन सकता है। राजकुमार ठाकुर कहते हैं कि इस पिछड़े इलाके में योजनाओं में मची लूट एवं प्रशासन में फैला भ्रष्टाचार विकास का अवरोधक बना हुआ है। नरगा योजना में शिथिलता जारी है। रोी के लिए मजदूरों का आये दिन पलायन हो रहा है। यह भी चुनावी मुद्दा बन सकता है। यदुनाथ मंडल कहते हैं कि झंझारपुर को जिला बनाने का सब्जबाग कई बार दिखाया जा चुका है। सिंचाई संसाधनों का दोहन नहीं हो पा रहा है।ड्ढr ड्ढr किसानों को कृषि उत्पादों का समर्थन मूल्य तक प्राप्त नहीं हो रहा है। जन वितरण प्रणाली में लूट मची हुई है। जनता इन सवालों को भी उठा सकती है। विरन्द्र पांडेय कहते हैं कि जिले में घोषणा के बाद भी एफ.एम. रडियो स्टेशन की स्थापना नहीं हुई है। विभिन्न प्रधानमंत्री सड़क योजना की स्वीकृत सड़कों का निर्माण विगत चार वर्षो से अधूरा है। यह मुद्दा गंभीर है। जबकि नरन्द्र कुमार बिजली की अनियमित आपूर्ति को चुनाव का गंभीर मुद्दा मानते हैं। कुल मिलाकर इन तमाम मुद्दों पर अभी से प्रत्याशियों का दिल धड़कनेलगा है।ं

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