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चिदंबरम का प्रस्ताव उल्फा को नामंजूर,कहा जेल में वार्ता नहीं

चिदंबरम का प्रस्ताव उल्फा को नामंजूर,कहा जेल में वार्ता नहीं

उग्रवादी संगठन उल्फा ने बुधवार को गृह मंत्री पी़ चिदंबरम के शांति वार्ता के प्रस्ताव को खारिज करते हुए अपने अध्यक्ष अरविंद राजखोवा के जेल में उल्फा नेताओं के साथ वार्ता नहीं करने के रुख का समर्थन किया।

तेजपुर में एक फास्ट ट्रैक अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए जेल में बंद उल्फा नेता भीमकांत बरागोहैन ने संवाददाताओं से कहा कि उल्फा नेता जेल में हथकडि़यों के बीच शांति वार्ता नहीं कर सकते।

उसने कहा कि शांति वार्ता पर फैसले के लिए उल्फा की समिति की बैठक बुलाने के लिए नेताओं को आजादी देनी होगी।

भीमकांत का वास्तविक नाम बिष्णुज्योति है और उल्फा कार्यकर्ता उसे मामा कहकर पुकारते हैं। भीमकांत ने चिदंबरम पर स्थानीय लोगों की भावनाओं को नहीं समझने का आरोप लगाया।

उसने कहा कि चिदंबरम यहां की जनता की भावनाओं के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। उन्हें असम की आर्थिक समस्याओं और भौगोलिक संस्थापन समेत वहां के हालात के बारे में पूरी तरह जानकारी नहीं है।

भीमकांत ने राज्य के कुछ लोगों पर सरकार के मध्यस्थ होने का आरोप लगाया।

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  • Web Title:चिदंबरम के शांति-वार्ता के प्रस्ताव को उल्फा ने खारिज किया