मुंबई एक इतालवी मां की नहीं हो सकती: ठाकरे

शिवसेना ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की 'मुंबई सभी भारतीयों के लिए' टिप्पणी पर और कड़ा रूख अपनाते हुए एक बार फिर सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पार्टी के...

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मुंबई एक इतालवी मां की नहीं हो सकती: ठाकरे
एजेंसी
Last Modified: Wed, 3 Feb 2010 3:45 PM

शिवसेना ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की 'मुंबई सभी भारतीयों के लिए' टिप्पणी पर और कड़ा रूख अपनाते हुए एक बार फिर सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि मुंबई भले ही सभी भारतीयों की हो सकती है लेकिन यह एक इतालवी मां की कैसे हो सकती है।
   
उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस के युवराज पूरी तरह हताश हो चुके हैं और इसी हताशा के कारण उन्होंने मराठी लोगों का और महाराष्ट्र का अपमान किया है।
   
ठाकरे ने लिखा है कि मुंबई देश की धर्मशाला नहीं है कि हर कोई मुंबई आ कर यहां बस जाए। 1920 के दशक में हुए संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में 105 लोग मारे गए थे। क्या 105 शहीदों ने अपना बलिदान इसलिए दिया था कि मुंबई एक धर्मशाला बन जाए।

ठाकरे के मुताबिक यह कहा गया है कि मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को किए गए आतंकवादी हमले के दौरान महानगरी को बिहारी कमांडोज ने बचाया था। ऐसा कहना हेमंत करकरे, विजय सालस्कर, अशोक काम्टे और तुकाराम ओंबले जैसे पुलिस कर्मियों की शहादत का अपमान करना है।
   
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि आतंकी हमले के दौरान आतंकवादियों का सफाया करने वालों में उत्तर भारत से आए एनएसजी कमांडो शामिल थे।

ठाकरे ने संपादकीय में लिखा है कि मुंबई महाराष्ट्र में आती है और मराठी लोगों की है। अगर कोई इस सत्य की हत्या करना चाहता है तो उसे महाराष्ट्र के अस्त्रों का सामना करना होगा।
   
वहीं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा था कि भारत सभी भारतीयों का है और लोगों को देश में कहीं भी जाने का अधिकार है। उन्होंने पटना में संवाददाताओं से कहा था कि बाल ठाकरे या राज ठाकरे ने जो भी कहा है, उसमें मुझे कोई भी दिलचस्पी नहीं हैं। साफ कहूं तो मुझे एक बात में दिलचस्पी है और वह यह कि भारत सभी भारतीयों का है और भारत का हर हिस्सा प्रत्येक भारतीय का है।
   
राहुल ने कहा था कि 26 नवंबर, 2008 के मुंबई हमले के दौरान एनएसजी में बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के लोग थे। तब उन्होंने (शिवसेना) नहीं कहा था कि जो लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं, उन्हें बाहर निकाल दिया जाए। भारत को आगे बढ़ना है और लोगों को आगे ले जाना है।

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