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प्राचार्यो के ट्रांसफर में पेंच, अधिकारी परेशानं

झारखंड राज्य यूनिवर्सिटी एक्ट 2000 में संशोधन कर चार साल में प्राचार्यो के ट्रांसफर की व्यवस्था की गयी है। परंतु प्राचार्यो की कमी के कारण उनके ट्रांसफर में काफी पेंच है। इस कारण अधिकारियों की परशानी बढ़ गयी है। हाल ही में तीन कॉलेजों को ऑटोनॉमस का दर्जा मिला है, इसलिए वहां के प्राचार्यो का स्थानांतरण फिलहाल संभव नहीं लगता। इस संबंध में यूजीसी ने निर्देश दिया है कि नये ऑटोनॉमस कॉलेजों के प्राचार्यो को व्यवस्था ठीक से लागू करने के लिए कम से कम तीन साल का समय दिया जाये। किसी बड़े कॉलेज को प्रभारी के भरोसे भी नहीं छोड़ा जा सकता। फिलहाल प्रभारी प्राचार्यो को बदल कर वरिष्ठ शिक्षकों को प्रभार देने पर विचार किया जा रहा है। अगले एक-दो माह में कुछ और कॉलेजों के ऑटोनॉमस होने के प्रस्ताव हैं। जिन कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं होंगे, उनका दावा कमजोर हो जायेगा।ड्ढr ऑटोनॉमस के रगुलेशन की रिपोर्ट यूनिवर्सिटी को सौंपीड्ढr रांची। मारवाड़ी कॉलेज के ऑटोनोमस के रगुलेशन की रिपोर्ट यूनिवर्सिटी को सौंपी गयी। कॉलेज के कुंदन ठाकुर ने यह रिपोर्ट कुलसचिव को दी। रिपोर्ट तैयार करने को लेकर एक कमेटी बनी थी। इसके अध्यक्ष संत जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य फादर निकोलस टेटे थे। कमेटी ने स्पष्ट किया कि ऑटोनोमस कॉलेज के प्राचार्य के ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान नहीं होगी।ड्ढr नगराटोली का दौरा कियाड्ढr रांची। रांची वीमेंस कॉलेज वोकेशन कोर्स (सीएनडी) की छात्राओं ने 28 को नगराटोली का दौरा कर घर-घर जाकर ट्राइबल लोगों के रहन-सहन एवं खान-पान की जानकारी ली।ंं

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