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नेत्र रोगियों मेंोढ़ा संक्रमण का खतरा

आँख के मरीाों को ोकर चिकित्सा विश्वविद्यााय प्रशासन शायद गम्भीर नहीं है। तभी तो आँखों के आइसोोटेड वार्ड में कैंसर, नाक-कान-गो और हड्डी रोग के गम्भीर मरीाों को भर्ती कर दिया गया। इससे 70ोिस्तरों वाो इस पूरे वार्ड में संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। मरीाों की शिफ्टिंग के समय वार्ड के कर्मचारियों और पीआरओ ऑफिस कर्मियों में नोकझोंक भी हुई।ड्ढr फरवरी में सरोनीगनर हादसे केोाद चिविवि में10 दिनोंोाद ऑपरेशन शुरू करने की योजना थी। एक ओटी तैयार हो गई है। मरीा भर्ती भी किए जानेोगे हैं। पाँच गम्भीर मरीाों को पुरुष वार्ड में भर्ती भी किया जा चुका है। रविवार को दोपहर दोोजे नेत्र रोग के विभाग के पुरुष वार्ड में अचानक कैंसर, नाक-कान-गाा और आर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के मरीाों की शिफ्ट किया जानेोगा। वहाँ मौजूद नेत्र रोग विभाग के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। तभी पीआरओ ऑफिस के कर्मचारी भी आ गए। उन्होंने सीएमएस के आदेश का हवा दिया।ोोो मरीाों को शिफ्ट करने का आदेश हुआ है। नर्स व स्टाफ ने इसकी सूचना विभागाध्यक्ष को दी। वार्ड के कर्मचारियों का कहना था कि आँख जसे संवेदनशीा वार्ड में कैंसर जसे गम्भीर रोगियों को भर्ती कर दिया गया। शिफ्ट किए गए कुछ ऐसे मरीा भी हैं जिन्हें एक महीने से पास्टर चढा है। कुछ की कोमोथेरेपी हो रही है। नाक-कान-गो में गम्भीर संक्रमण है। ऐसे में नेत्र रोगियों को उनके साथ कैसे रखा जा सकता है? नेत्र रोग विभाग के एक प्रोफेसर का कहना है किोमे समयोाद ऑपरेशन शुरू किए जाने की योजना थी। आ, वार्ड को विसंक्रमित किएोगैर आँखों के मरीा भर्ती नहीं सकेंगे। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार का कहना है कि वहोाहर हैं। वार्ड के कर्मचारी ने इसकी सूचना दी है। इस समंध में वह कुछ नहीं कह सकते। सीएमएस से पूछिए।ड्ढr क्या है खतराड्ढr पीजीआई के माइक्रोायोॉजी के प्रोफेसर टी.एन. ढो का कहना है कि नेत्र रोग वार्ड को पूरी तरह आइसोोट होना चाहिए। उसमें कोई दूसरा मरीा भर्ती न हो। क्रास इनफेक्शन होने की आशंका रहती है। वार्ड मेंोमे समय तक अगर मरीा भर्ती रखा जाए तो हॉस्पिटा एसोसिएटेड इंफेक्शन का खतरा रहता है। ोड तक संक्रमित हो जाता है।ड्ढr मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का तर्क- डॉ.एसएन शंखवार का कहना है कि नाक-कान गाा और आर्थोपेडिक वार्ड में मरम्मत होनी है। गैस्ट्रोसजरी विभाग के कुछ नए वार्डोनाए जाने हैं। आँखों का वार्ड खााी था, इसािए कुछ समय केोिए मरीाों को वहाँ शिफ्ट कर दिया गया। उनका कहना है कि एक महीने मरीाों को रखा जाएगा आँख के मरीाों को संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। वार्ड खााी था इसािए उसका उपयोग हुआ: कुापतिड्ढr कुापति प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाा का कहना है कि अस्पताा में ोड की कमी है। जहाँ मरीा अभी तक भर्ती थे वहाँ कुछ मरम्मत होनी है और गैस्ट्रोसर्जरी वार्डोनाया जाना है। यह शिफ्टिंग अस्थाई है। हड्डी रोग के मरीा आरएासी भेज दिए जाएँगे। मरम्मत होने केोाद नाक-कान गो के मरीा भी वापस वार्ड में भेजे जाएँगे। वैसे गर्मी में आँख के मरीाों की संख्या कम होती है, कुा पाँच मरीा भर्ती हैं वार्ड खााी था इसािए उसका इस्तेमाा करोिया गया।

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  • Web Title: नेत्र रोगियों मेंोढ़ा संक्रमण का खतरा