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रिमोट कंट्रोल से शासन मंजूर नहीं

झारखंड एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने का गौरव प्राप्त है। लेकिन यह लोकतंत्र फिलहाल झारखंड के नागरिकों के लिए नहीं है। इस नवगठित राज्य के पास अपने चुने हुए प्रतिनिधियों की लोकप्रिय सरकार नहीं है। फिलहाल दिल्ली के इशार पर महामहिम राज्यपाल द्वारा ताबड़तोड़ लिये जाने वाले फैसलों में से कौन से फैसले वाकई संवैधानिक दायर के अंतर्गत आते हैं और किन फैसलों को राजनीतिक फैसला माना जाना चाहिए, यह कहना मुश्किल है।वर्ष 2005 में राज्य की जनता ने अपने प्रतिनिधि चुने। किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण चार साल में चार सरकारों के प्रयोग हो चुके हैं। इसके बाद राष्ट्रपति शासन भी लग चुका है। अब इससे ज्यादा किस प्रयोग की गुंजाइश बचती हैं? आखिर किस उम्मीद के तहत राज्य की विधानसभा को भंग करने के बजाय निलंबित रखा गया है? क्या दिल्ली में बैठे कांग्रस आलाकमान को अब भी उम्मीद है कि बगैर विधानसभा चुनाव कराये, यहां सचमुच कोई लोकप्रिय सरकार बन सकती है? क्या अब भी खरीद-फरोख्त के जरिये कोई लंगड़ी और अनैतिक सरकार बनाने की संभावना तलाशी जा रही है? अगर हां, तो यह दुर्भाग्यजनक है। इसे झारखंड की जनता कतई स्वीकार नहीं करगी। अगर कांग्रस की ऐसी कोई गलत मंशा नहीं, तो उसे जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर किस उम्मीद के तहत विधानसभा को भंग करने की जगह निलंबित रखा गया है।लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी लोकप्रिय सरकार चुनने का हक है। अगर किसी वजह से ऐसी सरकार का गठन मुश्किल हो जाता है, तो मध्यावधि चुनाव कराये जाते हैं। देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय स्तर पर इसके उदाहरणों की भरमार है। फिर अभी तो एक अवसर भी है कि लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। अगर लोकसभा के साथ ही झारखंड विधानसभा के भी चुनाव करा दिये जायें, तो इससे जनता के खजाने के काफी पैसों की बचत हो सकती है। झारखंड की जनता को रिपोट कंट्रोल से चलाया जा रहा शासन मंजूर नहीं।ड्ढr बेहतर यही है कि चार साल में सरकारों के प्रयोग और फिर राष्ट्रपति शासन के बाद अब किसी भी नये प्रयोग का अनुचित प्रयास नहीं किया जाये। तत्काल विधानसभा भंग हो और लोकसभा के साथ विधानसभा का चुनाव कराकर झारखंड को झारखंडी जनता के हवाले कर दिया जाये। इससे धन भी बचेगा, समय की भी बचत होगी। राज्य की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग भी कर सकेगी और दिली के रिमोट क ंट्रोल से भी राहत मिलेगी।ड्ढr (लेखक नेता प्रतिपक्ष हैं।)

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  • Web Title: रिमोट कंट्रोल से शासन मंजूर नहीं