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होली, दिवाली व दशहरे का अनोखा संगम ‘लोसर’

राज्य के पर्वतीय इलाको में रहने वाले आदिवासी होली, दिवाली और दशहरे का मिला जुला त्योहार लोसर मनाकर अपनी परम्पराआें को जीवित रखे हुए हैं। यह भारत और तिब्बत के बीच सदियों से चले आ रहे सम्बन्धों को भी प्रगाढ़ बनाता है। उत्तरकाशी के डुृण्डा ब्लाक में भूटिया जनजाति के लोग पिछले तीन दिन इस त्योहार की मस्ती में डूबे रहे। क्या बच्चा और क्या बूढ़ा महिला हो या पुरुष सभी ने एक दूसरे के साथ होली खेली, मंदिर में दीप जलाकर दशहरा और दिवाली मनाई। ये लोग गुलाल से होली नहीं खेलते बल्कि एक दूसरे पर रंग की तरह सूखाआटा लगाकर खुशी जाहिर करते हैं। भूटियो के साथ ही तिब्बती भी भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना कर इस त्योहार में भाग लेते हैं। बौद्ध मंदिरों में बड़े बड़े रंगबिरंगी झंडे लगाए गए और त्योहार की मिठाई बांटी गई।देर रात तक लोग नाचगाने में मशगूल रहे।

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  • Web Title: होली, दिवाली व दशहरे का अनोखा संगम ‘लोसर’