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निर्जन द्वीपों पर मंडरा रहा है आतंकवादी खतरा

आशंका है कि आतंकवादी देश के सैंक़ड़ों निर्जन द्वीप में से कुछ पर अपना गोपनीय अड्डा बनाने की फिराक में हैं। देश की मुख्य भूमि से 1200 कि.मी. दूर स्थित अंडामान-निकोबार द्वीप समूह में कुल 572 द्वीप हैं जिनमें से सिर्फ 36 आबाद हैं और बाकी सूने पड़े हैं। इसी तरह मुख्य भूमि से 230 से 450 कि.मी. दूर दक्षिण पश्चिम में लक्ष्यद्वीप समूह के 36 में से सिर्फ दस आबाद हैं। गत 28 फरवरी को रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और नौसेनाध्यक्ष एडमिरल अरुण प्रकाश ने भी द्वीपों की सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर दिया। इसके लिए आधुनिक तीव्र गति वाले गश्ती पोतों के अलावा जल-थल (एंफिबियस) कार्रवाई की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। यहां एक नौसेना अधिकारी ने बताया कि अंडामान-निकोबार द्वीप समूह के निर्जन द्वीपों पर निगरानी रखने के लिए इस समय डोर्नियर जसे छोटे विमानों की मदद ली जा रही है जिनकी क्षमता चार घंटे तक उड़ान की है। लेकिन अब नौसेना मध्यम दूरी के टोही विमान भी खरीद रही है। टोही विमानों, हेलीकॉप्टरों, मानव रहित विमान आदि से प्राप्त सूचना के आधार पर पोर्ट ब्लेयर स्थित थल सेना की एंफिबियस ब्रिगेड के जवानों को निर्जन द्वीपों की छानबीन के लिए भेजा जाता है। एसी एक ब्रिगेड तिरुअनंतपुरम में है। अब एंफिबियस फोर्स को बढ़ा कर डिविजन स्तर तक ले जाने की योजना है। आतंकियों के इस मंसूबे से निपटने के लिए एक ओर जहां लंबी और मध्यम दूरी के टोही विमानों की खरीद हो रही है, वहां जलाश्व जसे बड़े स्वदेशी लैंडिंग प्लेटफार्म डॉक (ाल-थल कार्रवाई के लिए आवश्यक पोत) बनाने पर भी विचार हो रहा है। इस तरह के पोत की मदद से किनार से दूर रहते हुए सैनिकों को किसी भी द्वीप या दुश्मन की धरती पर भेजा जा सकता है।

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