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यमुना बहेगी तो रहेगा ताज

प्रसिद्ध इतिहासकार और जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आर. नाथ ने कहा कि ताजमहल बचाने की पहली शर्त है कि उसके ठीक पीछे बहने वाली यमुना में 20-30 फीट पानी का बहाव लगातार बना रहे। ताजमहल का स्थापत्य इस प्रकार का है कि उसके निचले खण्ड में पानी का धक्का लगते रहना बहुत जरूरी है और ऐसा न हो पाने से ही इसकी मीनारं झुक रही हैं। यमुना की नमी ही ताजमहल को प्रदूषण से बचाती भी रही है लेकिन अब उसे नमी की जगह जहरीली गैसें मिल रही हैं जो संगमरमर को काला कर रही हैं।ड्ढr लम्बे समय से ताजमहल को नुकसान पहुँचाने वाले कार्यो के विरोध में स्वर उठा रहे आगरा के प्रो. नाथ ने ‘हिन्दुस्तान’ से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने कहा कि ताजमहल कूप आधारित संरचना है उसके 12 टन के गुम्बद के लिए जो आधार तैयार किया गया है उसे बहते पानी के धक्के की बराबर जरूरत है। यमुना सूख रही है इसीलिए ताज की मीनारों में झुकाव आ रहा है।ड्ढr ंशाहाहाँ ने भी संरक्षित किया था ताजड्ढr लखनऊ। भारतीय संग्रहालय परिषद के अधिवेशन के दूसर दिन सोमवार को प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. रामनाथ ने कहा कि शाहाहाँ के समय में भी ताजमहल संरक्षित किया गया था। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों की नियुक्ित की गई थी।ड्ढr राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्पदा संरक्षण प्रयोगशाला के सभागार में पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय विज्ञानी डॉ.एम.एल.निगम ने कहा कि ताज को बचाने के लिए डॉ. नाथ के सुझावों पर अमल की जरूरत है।ं

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