DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गंभीर विषयों के लिए बहुत मेहनत चाहिए: नंदना सेन

गंभीर विषयों के लिए बहुत मेहनत चाहिए: नंदना सेन

आप कई सालों से सामाजिक मुद्दों से जुड़ी हैं।  क्या आपको लगता है कि आज के समय में जितनी एनजीओज हैं, उनका समाज पर कोई प्रभाव पड़ता है?
हां, बिल्कुल पड़ता है। जिन लोगों को आज गैर-सरकारी संगठनों के कारण मदद मिल रही है या यूं कहें कि एनजीओ के चलते जो लोग अपने भविष्य को बेहतर बना रहे हैं और अपनी बात रख पा रहे हैं, उन लोगों से पूछ कर देखिये कि उनके जीवन पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है।

बॉलीवुड के कलाकार आजकल समाज सेवा में बहुत अधिक रुचि लेने लगे हैं। कोई खास वजह?
यह तो बहुत अच्छी बात है। अगर बॉलीवुड इस ओर अग्रसर हो रहा है तो इसलिए, क्योंकि समर्थ लोग ही जरूरतमंदों की सहायता नहीं करेंगे तो  और कौन करेगा।

फिर तो समाज सेवा को लेकर बॉलीवुड में फिल्में भी बननी चाहिए?
बिल्कुल! बन भी तो रही हैं। अब आप मुझे ही देखिए, मैंने भी तो कुछ गंभीर मुद्दों से संबंधित फिल्मों में काम किया है।

लेकिन ऐसा कहा जाता है कि गंभीर फिल्में दर्शकों को रास नहीं आतीं?
नहीं ऐसा नहीं है, ‘पा’ फिल्म में भी एक मैसेज था, वो तो लोगों को बहुत पसंद आई। लेकिन यह सच है कि बॉलीवुड में ऐसी फिल्में कम ही बनती हैं। इसका एक मुख्य कारण यह हो सकता है कि गंभीर मुद्दों के लिए अलग से एक्स्ट्रा मेहनत की जरूरत होती है।

आप गंभीर विषयों से इतनी जुड़ी हैं तो क्या आपको कोई अपनी अलग से टीम नहीं बनानी चाहिए?
मेरा मानना है कि आप किसी गैर सरकारी संस्था से जुड़ कर भी वह काम कर सकते हैं, जो आप करना चाहते हैं। मैं भी ‘राही’ से जुड़ कर ऐसा ही कुछ कर रही हूं।

‘राही’ संस्था किन मुद्दों को ज्यादा हाईलाइट करती नजर आती है?
यह संस्था उन बच्चों के लिए काम करती है, जो यौन शोषण का शिकार हुए हैं। यह संस्था उन्हें गाइड करने, काउंसलिंग करने और भविष्य में इन घटनाओं से कैसे बचें, सिखाने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए भी काम करती है। बहुत ही सेंसिटिव मुद्दों पर इस संस्था द्वारा काम किये जाते हैं। इसीलिए मैं इस संस्था की ब्रांड एम्बेसेडर हूं।

आजकल दहेज एक्ट के दुरुपयोग की बात समाज में हो रही है। आपको क्या लगता है, इसमें कितनी सच्चाई है?
यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। मुझे लगता है कि हमारे देस में कानून के जानकार ही कितने हैं, तो ऐसे में दुरुपयोग या सदुपयोग का सवाल ही कहां उठता है? फिर भी मैं इस मुद्दे पर कोई खास टिप्पणी नहीं करना चाहती। फिर कभी इस मुद्दे पर लंबी बातचीत की जा सकती है, लेकिन फिर मैं इतना अवश्य कहना चाहूंगी कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा जागरूक हो रही हैं और वे अपने लिए बने कानूनों का सही इस्तेमाल करना चाहती हैं। ऐसे में कुछ लोग यह कह सकते हैं कि इसका दुरुपयोग हो रहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गंभीर विषयों के लिए बहुत मेहनत चाहिए: नंदना सेन