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साथी, तुम्ही सो गये दास्तां कहते-कहते..

ल ही तो बोल कर निकला था कामरड, अचानक क्या हो गया। अब कौन लड़तो रामचंद्र गरीबन के लड़ाई। साधारण चप्पल, मामूली कुर्ता-पायजामा और जेब में सरकारी साहबों के नाम किसान-मजदूर के दर्जनों दरख्वास्त। गांव-गिराव में दस किलोमीटर तक पैदल चलते। पार्टी कार्यालय पहुंचते ही भाकपा के वरिष्ठ नेता रमेंद्र कुमार एक सांस में यह सब बोल गये। सामने बैठे थे राजद के पूर्व विधायक जनार्दन पासवान। रमेंद्र ने इतना भर कहा : जनार्दन। पासवान की आंखों से लोर झरझरा गये। भैया, सुबह नौ बजे ही तो हमारी बात हुई थी..।ड्ढr फोन की घंटी घनघना रही है। कभी सांसद भुवनेश्वर मेहता, तो कभी इटखोरी, सिमरिया से कार्यकर्ता। मेहता भी काफी विचलित थे। पार्टी कार्यालय पहुंचनेवालों को सहसा विश्वास नहीं होता, कोने में चौकी पर एक चारखाने चादर पर लिटा मेहनतकश अवाम की मुखर आवाज शांत हो गयी है। लाल झंडे के अलंबरदार राम 30 वर्षो से संघर्ष में जी रहे थे। मामूली नौकरी छोड़ उन्होंने राजनीति शुरू की। गरीबों के लिए लगातार लड़ते रहे। एक प्याले चाय में दिन गुजार देते। मेहनतकश अवाम के लिए जीते थे। 1से ही सिमरिया विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। 2008 में पहली बार जीते। जब जीते, तो लोगों ने कहा : रामचंद्र का वनवास टूटा।ड्ढr करीब 12 बजे विधायक का शव पार्टी कार्यालय लाया गया। वामपंथी आते, फूल-माला चढ़ाते और मुट्ठी भींच कर कामरड को सलाम कहते। बर्फ, फूल-माला, शव ले जाने के लिए गाड़ी और कॉफीन की व्यवस्था में सार लोग जुटे हैं। लेकिन पैसे की व्यवस्था अहम हो गयी। पार्टी नेता पीके गांगुली ने कुछ पैसे निकाले, तो हाार-पंद्रह सौ जनार्दन पासवान ने। पार्टी नेता जनार्दन प्रसाद, बीएन सिंह, खगेंद्र ठाकुर खामोश हैं। किसी ने कहा : शव विधानसभा जायेगा क्या? यह सुनते ही रमेंद्र फफक पड़ते हैं।ड्ढr दहाड़ मार रो रहे थे बेटा-बेटीड्ढr रामचंद्र राम भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं। चार बेटियां और दो बेटे हैं। एक बेटी अगस्तिना बीआइटी मेसरा की छात्रा है। 1.30 बजे वह पार्टी कार्यालय पहुंची। पिता के शव से लिपट दहाड़ मार रोने कोने में घंटे भर से खामोश बैठे बेटे मनोज कुमार भी दहाड़ मार कर रोने लगे।ड्ढr जांच के लिए खून दिया थाड्ढr ुउनका इलाज गांधीनगर के डॉ एसबी खलखो कर रहे थे। सोमवार को सुबह वह अस्पताल पहुंचे और शुगर टेस्ट के लिए खून देकर आये थे। लगता है अब नहीं बचेंगे..ड्ढr विधायक के ड्राइवर मो नासिर के मुताबिक चार तल्ले अपार्टमेंट से वह जसे ही नीचे उतर, छाती में दर्द की शिकायत की। बेचैनी भी महसूस कर रहे थे। विधायक ने ड्राइवर और अंगरक्षकों से कहा : लगता है अब नहीं बचेंगे। उन्हें गाड़ी में लिटाया गया। इस बीच विधायक ने अपने एक रिश्तेदार डीएसपी पुनीत राम को फोन किया। राम तुरंत पहुंचे। बेटा मनोज कुमार भी आये। गांधी नगर अस्पताल में डॉ एसबी खलखो, वीके शर्मा, आरके सिंह इलाज में जुटे। लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। पहले से ही उन्हें वॉल्व में तकलीफ थी। पार्टी नेता बड़े अस्पताल में इलाज के लिए सलाह भी देते थे, लेकिन वह टाल जाते थे। राज्य के लिए अपूरणीय क्षति : नामधारीड्ढr रांची। पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी ने विधायक रामचंद्र राम के निधन पर शोक व्यक्त किया है। कहा है कि लंबे संघर्ष के बाद जीत हासिल कर उन्होंने कुछ ही दिनों के अंदर सदन में लोकप्रियता प्राप्त की थी, वह चिरस्मरणीय रहेगी। चतरा प्रवास के दौरान विधायक उनके कार्यक्रमों में शामिल हो जाया करते थे। इस हर दिल अजीज विधायक की मृत्यु पूर राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है।ड्ढr काफी मृदुभाषी थे रामचंद्र : आलमगीरड्ढr रांची। स्पीकर आलमगीर आलम ने विधायक रामचंद्र राम के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है, जिसकी भरपाई मुश्किल है। उन्होंने कहा कि स्व रामचंद्र राम ने कम दिनों में जनहित से जुड़े कई मुद्दों को सदन में उठाया। वे काफी मृदुभाषी व्यक्ितत्व के थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर स्व राम की आत्मा को शांति दे और इस दुख की घड़ी में उनके परिानों को शक्ित दे।ड्ढr विधानसभा में भी दी गयी श्रद्धांजलिड्ढr रांची। दिवंगत विधायक रामचंद्र राम को विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गयी। अपराह्न् तीन बजे उनके पार्थिव शरीर को विधानसभा लाया गया। स्पीकर आलमगीर आलम, राजद विधायक अन्नपूर्णा देवी, कांग्रेस विधायक सौरभ नारायण सिंह, नियेल तिर्की, भाजपा विधायक सत्यानंद भोक्ता, पूर्व विधायक योगेंद्र बैठा, पूर्व विधायक जनार्दन पासवान ने पुष्पांजलि कर उनहें श्रद्धांजलि दी।ं

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