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अस्पताल पहँुचने के पहले ही उसने दम तोड़ दिया

रैबीा बीमारी से पीड़ित बहराइच की मोना (20) के परिवार को बेफ्रिकी का खामियाजा उसकी दर्दनाक मौत से उठाना पड़ा। ढाई महीने पहले बीते ढाई महीने पहले युवती कोगाँव में कुत्ते ने काट लिया था। पालतू कुत्ता समझकर एंटी रैबीा वैक्सीन नहीं लगवाई, नतीजे में वायरस ने असर दिखाया और उसकी हालत बिगड़ गई। घरवाले उसे अस्पताल के लिए लेकर चले लेकिन एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने के बीच युवती ने मंगलवार तड़के रास्ते में दम तोड़ दिया। उसे अगर अस्पताल में समय से भर्ती करा दिया जाता तो शायद मौत सुकून से होती।ड्ढr घरवालों का कहना है कि दो दिन पहले मोना की हालत खराब हुई थी। दर्द से वह तड़प रही थी, इसलिए उसे बांध दिया गया था। पहले जिला अस्पताल ले गए जहाँ से लखनऊ भेज दिया गया। एक रिश्तेदार की मदद से लोहिया अस्पताल लाए लेकिन वहाँ चिकित्सकों ने संक्रामक रोग अस्पताल रेफर किया। संक्रामक रोग अस्पताल के रास्ते में ही युवती ने आटो में ही दम तोड़ दिया। संक्रामक रोग अस्पताल की डॉ. रेनू जलोटे कहती हैं कि अस्पताल आने से लोग घबराते हैं। भटकने में ही समय खत्म हो जाता है। वह बताती हैं कि रैबीज बीमारी से पीड़ित मरीाों को अस्पतालों से रेफर करते समय डॉक्टर बता देते हैं कि बचने की संभावना नहीं है इसलिए घरवाले और निराश हो जाते हैं। मरीाों को अस्पताल में भर्ती नहीं कराते। उनके मुताबिक कुत्ता काटने के बाद लगने वाले एंटी रैबीज वैक्सीन की व्यवस्था तो हर सरकारी अस्पतालों में है लेकिन संक्रमित मरीाों की भर्ती के लिए लखनऊ में डालीगंज-नबीउल्लाह रोड क्रासिंग स्थित सिर्फ एक संक्रामक रोग अस्पताल है। वहाँ ऐसे मरीाों के लिए तीन आइसोलेटेड बेड हैं। एंटी रैबीा वैक्सीन को त्वचा में लगाने के विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद नसीर सिद्दीकी का कहना है कि रैबीा बीमारी अचानक होती है। कुत्ता काटने के तीन दिन के भीतर से 20 साल बाद भी वायरस सक्रिय हो सकता है। कोई जाँच नहीं है। जब मरीा का शरीर अकड़ने लगे, हवा, पानी व रोशनी से दूर भागने लगे तो समझिए रैबीज वायरस पूरी तरह सक्रिय हो गया है। ऐसी हालत में मरीा के बचने के संभावना नहीं होती।

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