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दो टूके

आवासीय विद्यालयों के बच्चों की डाइट चार्ट जब पेशे-नजर की गयी थी, तो गंवई बच्चों की जुबान पनिया गयी थी। उन्हें मिलता था- अंडा, दूध, फल, सोयाबीन, पौष्टिक अनाज और गंवई बच्चे खिचड़ी-चोखा से ही संतोष कर लेते थे। अब आवासीय विद्यालयों के मेन्यू से अचानक पौष्टिक तत्व गायब हो गये हैं। वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद बाबुओं की तनख्वाह 70 फीसदी तक बढ़ गयी है, पर बच्चों के भोजन में कटौती का यह फरमान ऐसा है, मानालजीज खीर की डिश हटाकर उबला खाना परोस दिया गया हो। अच्छी शिक्षा और पौष्टिक भोजन से जिन बच्चों की पीढ़ी तैयार की जा रही थी, उनकी थाली में अब रंगत नहीं होगी। कै लोरी नहीं होगी। फिर वे कैसे भाग पायेंगे अपनी मंजिल की ओर।

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