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‘चुभते हैं सौंदर्य प्रतियोगिता के ताज के हीरे’

मिस इंडिया या मिस वर्ल्ड का चमचमाता ताज पहने किसी सुंदरी की मुस्कान आपके दिल के भीतर तक उतर सकती है, लेकिन इस ताज में कांटे भी छिपे होते हैं और इस मुस्कान के लिए उसे बकायदा डॉक्टर के निर्देशानुसार अभ्यास भी करना पड़ता है। मिस इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता की एक ब्यूटी क्वीन ने इस प्रतियोगिता के पीछे की कष्टदायक कहानी को अपने शब्दों में पहली बार लिपिबद्ध किया है जो ग्लैमर की दुनिया की एक दूसरी ही तस्वीर पेश करती है। फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता (2004) में भाग ले चुकी इरा त्रिवेदी ने अपनी पुस्तक ‘इस ताज के हीरे चुभते हैं’ में सौंदर्य प्रतियोगिताआें के जरिए बाजार के युग में स्त्री की देह को प्रदर्शित करने की तकलीफदेह कथा को पेश किया है। पुस्तक में त्रिवेदी ने लिखा है कि ग्लैमर की यह दुनिया पूरी तरह नकली है, लेकिन इसके लिए बड़े घरानों की लड़कियां दिन-रात ट्रेनिंग लेती हैं और मिन्नत करती हैं कि किस तरह एक दिन हीरों का यह ताज उन्हें मिल सके। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस पुस्तक का आज लोकार्पण कर रही हैं। पुस्तक के अनुसार ब्यूटी क्वीन बनने की इच्छुक लड़कियों के लिए मुस्कराहट अहम चीज है। खूबसूरत टांगों की तरह इसे भी बहुत अहमियत मिलती है। इसी मुस्कराहट के जरिए वह अपना आत्मविश्वास, गरिमा और आकर्षण बिखेरती हैं। इसी मुस्कराहट के जरिए वह निर्णायकों तथा दर्शकों को लुभाती और बांधती है। यही वह मुस्कराहट है जो उसे पूरी प्रतियोगिता के दौरान अपने चेहरे पर चस्पां रखनी है और एक सेकेंड के लिए भी उसे गायब नहीं होने देना है। यही मुस्कराहट उसकी घबराहट, फिक्र और तकलीफदेह हील से होने वाली परेशानी को छिपाती है। पुस्तक में त्रिवेदी ने अपने अनुभवों को यों व्यक्त किया है, ‘‘यह नकली दुनिया थी ऐसी दुनिया जहां दाग मेकअप से ढक दिए जाते हैं, ऐसी दुनिया जहां बस एक चमकीली परत दिखती है, जहां दरारें हीरों की चमक से दबा दी जाती हैं। जहां ऐसे खूबसूरत शब्द कहे जाते हैं जिनका कोई मतलब नहीं होता, जहां ऐसी कहानियां गढी जाती हैं, जिनमें कोई सार नहीं होता, जहां दुनिया किसी खूबरसूरत गुलाब की तरह लगती है जिसकी मादक महक आपको करीब और करीब खींचती है। उन्होंने पुस्तक में आगे लिखा है कि आप उसके खूबरसूरत रंग और खुशबू के जादू में बंध जाते हैं, लेकिन जब उसे छूने के लिए आगे बढ़ते हैं तो तीखे दर्द के अहसास से हाथ खींच लेते हैं। उस छोटे मगर तकलीफदेह जख्म से बहते खून का रंग लाल है, गुलाब के लाल रंग से कहीं यादा गहरा लाल। पुस्तक के अनुसार यह एक ऐसी दुनिया है दोस्तो जहां चीजें हकीकत में वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखाई पड़ती है। मैंने इसकी चमकती परत के नीचे जाने की कोशिश की थी, मगर जब इसने एक नन्हा सा कांटा मुझे चुभोया तो मैं पीछे हट गई, बहुत पीछे। उसकी चुभन से बहुत दर्द हुआ, मगर सिर्फ एक पल के लिए।

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  • Web Title: ‘चुभते हैं सौंदर्य प्रतियोगिता के ताज के हीरे’