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मध्य प्रदेश के 9 संसदीय क्षेत्रों में होंगे नए चेहरे

मध्य प्रदेश में परिसीमन के बाद होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव में नौ संसदीय क्षेत्रों की कमान नए चेहरों के हाथ में आने वाली है। परिसीमन के चलते हुए बदलाव ने 2में से नौ संसदीय क्षेत्रों को नया रूप दे दिया है। ाजनीतिक दलों को न चाहते हुए भी इन क्षेत्रों में नए चेहरों पर दांव लगाना होगा। परिसीमन से मध्य प्रदेश में संसदीय सीटों की संख्या में तो कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन उनके स्वरूप और स्वभाव में बदलाव जरूर हुआ है। तीन संसदीय क्षेत्र झाबुआ, शाजापुर और सिवनी का अस्तित्व खत्म हो गया है। इसके अतिरिक्त तीन नए संसदीय क्षेत्रों के अस्तित्व में आने के बाद कुल नौ संसदीय क्षेत्र ऐसे हो गए हैं जहां बदलाव के मुताबिक पार्टियों को उम्मीदवार उतारने पडें़गे। परिसीमन के चलते देवास, रतलाम और टीकमगढ़ जसे नए संसदीय क्षेत्रों का जन्म हुआ है। वहीं पिछले चुनाव के आरक्षित क्षेत्र मुरैना, सागर और सीधी अब सामान्य हो गए हैं। इतना ही नहीं पिछले चुनाव में सामान्य रहे भिन्ड, खरगोन और बैतूल अब आरक्षित हो गए हैं। इससे एक बात साफ हो जाती है कि नौ संसदीय क्षेत्रों में परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव हो रहा है। लिहाजा यहां से जो भी उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा वह क्षेत्र के लिए नया चेहरा होगा। परिसीमन के कारण हुए बदलाव और नौ संसदीय क्षेत्रों के बदले स्वभाव ने तमाम राजनीतिक दलों के सामने भी सवाल खड़े किए हैं। उन्हें इन संसदीय क्षेत्रों के लिए ताकतवर उम्मीदवार की तलाश के लिए माथापच्ची करनी पड़ रही है।

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