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देर आयद, दुरुस्त आयद

सीमा विवाद व मानवता इंसान की जान की कीमत से ज्यादा पुलिस की सीमाएं अहमियत रखती हैं। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ित प्राथमिक उपचार के लिए तड़पता रहता है और हमारी पुलिस सीमाओं का रोना रोती रहती है। सीमाओं की हद से ज्यादा मानवता की हद है। सीमाओं का विवाद तो फिर भी सुलझ जाएगा, लेकिन सही समय पर प्राथमिक उपचार नहीं होने के कारण कई जानें चली जाती हैं। वह किसी का बेटा तो किसी का सुहाग व किसी का पिता होता है जो कभी वापस नहीं आता। अत: पुलिस के आला-अधिकारी इस मार्मिक संवेदना को समझें। इस आदेश का अनुपालन हो वरना न जानें विक्की जसे कितने व्यक्ितयों की जानें जाती रहेंगी। धर्मवीर आनन्द, आनन्द विहार, दिल्ली तस्वीर साफ इधर कुछ समय से फिल्म ‘स्लमडॉग’ जोरों से खबरों में छायी हुई है और ऑस्करों के मिलने के बाद तो कुछ अधिक ही । आपके पत्र में पहले ‘पश्चिमी जायके का मसाला’ के. विक्रम सिंह (8 फरवरी) तथा ‘ऑस्कर की शक्ल में तमाचा’ अमिताभ पाराशर (25 फरवरी) के लेखों द्वारा स्लमडॉग की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है या कहें पोल खुल गई है। आज रातों-रात बन जाने वाले बुद्धिाीवियों की भी आंखें शायद इन लेखों से खुलें। ओम प्रकाश, रामप्रस्थ, गाजियाबाद जाम का जिम्मेवार कौन? हर क्षेत्र में दादा टाइप बदमाश बगैर लाइसेंसी रिक्शे किराए पर चलवाते हैं। बाहर से आने वाला कोई भी मजदूर कम रट में रिक्शा चला कर पेट भरता है। कॉलोनियों में सुबह और रात में रिक्शों का जमावड़ा देखा जा सकता है। मेट्रो स्टेशन प्रताप नगर के पास, लिबर्टी सिनेमा के पीछे, इंद्र लोक मेट्रो स्टेशन के सामने और सांभा नर्सिग होम के पास सड़क जाम हो जाती है। ट्रैफिक पुलिस इसमें मूकदर्शक बनी हुई है। अशोक गुप्ता , सदर बाजार, दिल्ली स्वागत समारोह आजकल हर उत्सव या समारोह में सबसे पहले सभापति एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया जाता है। चाहे राष्ट्रीय, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक, विदाई एवं अन्य कोई भी समारोह हो, वहां मूलभूत उद्देश्यों को गौण छोड़कर नेताओं, दानदाताओं, अधिकारियों आदि विशिष्ट अतिथियों का मान बढ़ाया जाता है। इस दौरान माला पहनाना, चाय-नाश्ता एवं अन्य भेंट पूजा की जाती है और उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की जाती है। यह कार्यक्रम घंटों चलता रहता है। बाहर से आए दर्शक केवल ताली बजाने का कार्य करते हैं। इसमें समय और धन की बर्बादी होती है। युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांवं

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