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हमला तो बहाना, था पुलिस को बुलाना!

फरवरी महीने की आखिरी रात को ‘काली रात’ बनाने की नक्सलियों ने मुकम्मल तैयारी कर रखी थी। भागलपुर-किउल रल खंड पर 28 फरवरी को रतनपुर और मसूदन स्टेशनों पर माओवादियों के हथियारबंद जत्थे का हमला तो उनका बहाना था। दरअसल इसी बहाने जिला पुलिस को मौके पर बुलाना और फिर ‘एम्बुश’ करने की साजिश थी! हालांकि षडयंत्र लीक हो जाने से माओवादियों की मंशा पूरी नहीं हुई और बड़ी अनहोनी टल गई। घटनास्थल और आसपास के इलाकों में छानबीन कर पटना लौटे आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह सनसनीखेज खुलासा किया।ड्ढr ड्ढr नक्सलियों के ‘मिशन रतनपुर स्टेशन’ व अन्य खतरनाक इरादे की खबर जिला पुलिस के आला अफसरों तक पहुंचने के कारण विशेष रणनीति के तहत पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ जवाबी मोर्चा संभाला। उस दिन सौ से अधिक उग्रवादियों ने रतनपुर स्टेशन पर धावा बोलते हुए मारपीट कर रलकर्मियों को भगाने के बाद स्टेशन परिसर में आग लगा दी थी। उसी समय मसूदन स्टेशन पर भी माओवादियों ने कर्मियों को खदेड़ कर सरकारी कागज आदि में आग लगा दी थी। वैसे यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते एक महीने में ही राज्य के विभिन्न जिलों में आधा दर्जन बड़े नक्सली हमलों में 10 पुलिसकर्मियों समेत 13 लोगों की मौत हो चुकी है। आलम यह है कि पिछले पांच वर्षो में बिहार पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की 138 घटनाओं में 87 जवान शहीद हुए जबकि 64 नक्सली मार गये हैं।ड्ढr ड्ढr बहरहाल किसी समारोह में बुला कर या फिर हमले की आड़ में नक्सलियों द्वारा पुलिस की घेराबंदी के नए ट्रंड से सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां भी सकते में है। बीते 10 फरवरी को नवादा जिले के कौआकोल थाने के महृुलियाटांड़ गांव में नक्सलियों का खूनी खेल इसी सच्चाई पर मुहर लगाता है। महुलियाटांड़ में संत रविदास जयंती समारोह में भाग लेने पहुंचे थानाध्यक्ष रामेश्वर राम समेत 10 पुलिसकर्मियों की हत्या कर नक्सलियों ने तांडव मचाया था।ं

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  • Web Title: हमला तो बहाना, था पुलिस को बुलाना!