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दो टूक

मैट्रिक की परीक्षा में फर्ाीवाड़ा। सुनने में अजीब लगता है। पर यह हैरान करनेवाला है। जो बच्चे कैरियर का पहला कदम ही अनियमितताओं की राह पर बढ़ा रहे हैं, देश और समाज उनपर कैसे गर्व कर सकता है। महा पॉकेट खर्च निकालने के लिए हाार रुपये प्रतिदिन के एवज में दूसरों की कॉपियां लिखनेवाले नहीं जानते कि उनके इस कदम से संबंधित छात्र के समूचे जीवन में किस कदर अकर्मण्यता का कोढ़ साथ लग जानेवाला है। मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं में ऐसे कारनामे होते रहे हैं। यूपीएससी की परीक्षा पर भी एकबार ऐसा धब्बा लग चुका है। पर मैट्रिक का आयरन गेट भी जो अपनी मेधा के बूते नहीं पार करंगे, वे हंसों की जमात में कौए की तरह प्रतिष्ठाहीन जीवन ही जिएंगे। ऐसी सफलता आखिर किस काम की?

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