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कॉमनवेल्थ में कमाल की उम्मीदें

हर बीता साल नए साल के लिए कुछ चुनौतियां, कुछ इम्तिहान के मुद्दे और कुछ उम्मीदें छोड़कर जाता है। नए संकल्प और मजबूत इरादों के साथ जब हम नए साल का स्वागत करते हैं तो उसके संग कई नई उम्मीदें भी जोड़ते हैं। बुराई के खिलाफ अच्छाई की जीत, कल्याण और समृद्धि की कामना हम अपनी परंपरा से करते ही हैं पर यथार्थ के धरातल पर मौजूदा व्यवस्था तो रातों-रात बदलती नहीं। कुछ बेहतर योजनाएं जरूर रहती हैं जिन्हें अमल में लाने से हम नए साल के बहाने बेहतरी की उम्मीदें बांधते हैं। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी ही कुछ आशाओं की चर्चा

नया वर्ष खेल के लिए नई उम्मीदों से भरा है। इधर, कुछ समय से जिन खेलों में हमारी पहचान नगण्य थी, उनमें भी हम अपना परचम लहराने लगे हैं। बैडमिंटन, शूटिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती, टेनिस आदि में हमारे खिलाड़ी दुनिया के सामने चुनौती प्रस्तुत करने को आतुर हैं। वर्ष 2010 में हम राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने जा रहे हैं। मेजबान होने के नाते उम्मीद है कि हम इस बार अधिक पदक भी जीतेंगे। इसी वर्ष चीन में होने वाले एशियाई खेलों से भी हमें कई पदक लाने हैं। कुछ खेलों में हमारे मजबूत दावे भी हैं। पेश है इनकी एक झलक।
बने रहें क्रिकेट में नम्बर वन
क्रिकेट में टीम इंडिया टेस्ट में पहला स्थान पा चुकी है, पर अगले वर्ष हमारे सामने इस जगह को बचाने रखने की चुनौती है। साथ ही हमें वनडे में भी शीर्ष स्थान पाने का प्रयास करना है। हम124 अंक लेकर टॉप पर हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका 122 और ऑस्ट्रेलिया 116 अंक के साथ हमारे पीछे हैं। चिंता यह है कि इन दोनों टीमों को अगले साल हमसे अधिक टेस्ट खेलने हैं। टीम इंडिया वर्ष की शुरुआत बांग्लादेश दौरे से कर रही है पर आईसीसी की पहल पर हमें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट की मेजबानी भी मिली है। यदि हम अफ्रीका को हरा देते हैं तो नम्बर एक पोजीशन बचाए रखने की तरफ बढ़ सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका ही नम्बर एक पोजीशन छीनने का दावेदार है। वनडे में भी टीम इंडिया की शानदार फॉर्म में है। टीम संतुलित है और उसके हौसले सातवें आसमान पर। वनडे में भी हम टॉप स्पॉट से बहुत दूर नहीं हैं। शीर्ष पर चल रही ऑस्ट्रेलिया के जहां 130 अंक हैं, वहीं हमारे122 हैं।  वनडे हमें इस साल 35 खेलने हैं। इनमें अधिक तो अपनी ही जमीन पर हैं। 7 मैचों की सीरीज ऑस्ट्रेलिया से है। यदि हम ऑस्ट्रेलिया से भी सीरीज जीत जाते हैं तो हमारा शीर्ष पर पहुंचना पक्का है।
विश्व हॉकी में प्रतिष्ठा पाने का मौका
अठ्ठाइस फरवरी से 13 मार्च तक दिल्ली में विश्व कप हॉकी का का माहौल रहेगा। इसमें 12 टीमें भाग लेंगी। दो पूल में बंटी टीमों में से पूल बी में भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, इंग्लैंड, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका  टीमों की चुनौती होगी। यह नायाब मौका है जब हम अपना खोया सम्मान हासिल कर सकते हैं। हॉकी के लिए हमने हो ब्रासा जैसे अनुभवी कोच को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी है। उनके साथ देश की रग-रग पहचानने वाले हरेंद्र सिंह को जोड़ा गया है। ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह और दिवाकर राम, कप्तान राजपाल सिंह, अनुभवी प्रभजोत सिंह, दीपक ठाकुर, तुषार खांडेकर, गुरविंदर सिंह चंडी जैसे प्रहारकों के साथ मध्य पंक्ति में विक्रम, हलप्पा, गुरबाज सिंह, भरत चिकारा जैसे मजबूत खिलाड़ी हैं। रक्षा पंक्ति में सरदार सिंह के साथ दिलीप टिर्की भी होते तो शानदार रहता।
राष्ट्रमंडल में स्वर्ण की आशा
महिला हॉकी में हमारा राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन शानदार है। 2002 के मेनचेस्टर खेलों में हमने स्वर्ण जीता था। 2006 के फाइनल में हालांकि हम ऑस्ट्रेलिया से एक विवादास्पद गोल से हारे थे पर तब भी दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार आक्रामक स्ट्राइकर सुरेंद्र कौर की कप्तानी में सोना लाने की उम्मीद है। संयोग है कि इस बार भी महाराज कृष्ण कौशिक कोच हैं जिनके नेतृत्व में स्वर्ण पा चुके हैं।
निशानेबाजी में शूटर दिखाएंगे जलवे
एथेंस में राज्यवर्धन सिंह राठौर और बीजिंग में अभिनव बिंद्रा के क्रमश: रजत एवं स्वर्ण पदकों ने शूटरों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। हम राष्ट्रमंडल खेलों में पहले भी शूटिंग में पदक लाते रहे हैं पर इस बार तो  प्रतियोगिता अपने ही देश में है। बिंद्रा एवं राठौर के साथ साथ मानवजीत सिंह, गगन नारंग, अवनीत कौर, अंजलि वेदपाठक सरीखे शूटरों की लंबी फेहरिस्त है। इनके अलावा पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में पदकों के ढेर लाने वाले समरेश जंग और अनुजा जंग भी मौके के इंतजार में हैं। 
मुक्केबाजी में प्रभुत्व की आशा
विजेंदर सिंह ने बीजिंग में कांस्य जीतकर जहां देश को पहला ओलंपिक पदक दिलाया वहीं अखिल कुमार और जितेंद्र कुमार ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। सुरंजय ने 15 साल बाद देश को एशियाई चैंपियन बनकर दिखाया। 75 किलो में विजेंदर सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज  है। विश्व चैंपियन को हराने के बाद भी पदक न पाने का मलाल अखिल को है।
विश्व शतरंज में आनन्द लाएंगे जीत
विश्वनाथन आनन्द बुल्गारिया के सोफिया में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में भाग लेंगे, जिसमें वह 12 से अधिक बाजियां खेलेंगे। जब आनन्द जैसा खिलाड़ी देश के लिए खेल रहा हो तो जीत की हमेशा संभावना रहती है। आनन्द को जनवरी में जर्मनी के कोरस टूर्नामेंट के बाद कई टूर्नामेंट खेलने हैं। विश्व चैंपियनशिप से पूर्व खेले गए टूर्नामेंट उन्हें शीर्ष फार्म में ला देंगे।
बैडमिंटन में नेहवाल चमकता सितारा
बीजिंग ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली सायना नेहवाल से देश को बहुत उम्मीदें हैं। इंडोनेशियाई सुपर सीरीज की विजेता और विश्व की 8वें नम्बर की खिलाड़ी सायना का सफर शानदार चल रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों और चीन के एशियाई खेलों में उनसे पदक की पूरी उम्मीद है। चेतन आनन्द भी राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण के दावेदार हैं। उनकी पत्नी ज्वाला गट्टा और वी दीजू की जोड़ी  सफलताएं पा रही हैं। उनका युगल खिताब भी पक्का नजर आता है।
टेनिस में युवा शक्ति
लिएंडर पेस और महेश भूपति के अनुभव के साथ अब देश में टेनिस की युवा शक्ति भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। सोमदेव देववर्मन और युकी भांबरी विशेष रूप से अच्छा करते आ रहे हैं। सानिया ने ऊंची छलांग नहीं मारी पर वह राष्ट्रमंडल में पदक की दावेदार हैं ही। आशा है कि 2010 में सोमदेव, युकी, रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्जा भी अंतरराष्ट्रीय टेनिस में देश के लिए और सफलताएं अर्जित करेंगे।
फुटबाल में जादू
जिस तरह इंग्लैंड के अनुभवी कोच बॉब हॉटन ने फुटबाल की दशा सुधारने का जिम्मा लिया है। उन्होंने जहां टीम को एएफसी चैलेंज कप जितवाया, वहीं नई दिल्ली में नेहरू कप का सिरमौर भी दिलवाया। एएफसी चैलेंज कप की जीत के साथ भारत ने 24 वर्ष बाद 2011 के एशिया कप में खेलने का अधिकार पाया है। उन्होंने हीरे तराशने का काम हाथ में लिया है। बाईचुंग भूटिया जैसे भारतीय सितारे का तो कहना ही क्या पर हॉटन ने सुनील क्षेत्री को तराश कर टीम की ताकत बढ़ा दी है। साथ ही सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी गोलकीपर होता है। सारी टीम के किए कराए पर यह शख्स पानी फेर सकता है। सुब्रत पॉल के रूप में भारत को ऐसा गोलकीपर मिला है जो मैच जिताने की क्षमता रखता है। अब दो खिताबी जीतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पॉल आत्मविश्वास से लबालब है। अगला साल टीम को इसी तरह सफलताओं की राह में चलते देखने का है।

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