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हिन्दुस्तान के हीरोः ये हैं अपने-अपने क्षेत्र के महारथी

हिन्दुस्तान के हीरो एसएमएस सर्वेक्षण के नतीजे इस बार काफी हद तक रोचक रहे, लेकिन इस मायने में चौंकाने वाले भी कि हमारे पाठकों नें कुछ क्षेत्रों में जिसे भी हीरो चुना, खूब छानकर और छक कर चुना। वोटों का अनुपात काफी उतार चढ़ाव लिए हुए था। बिहार में जहां सर्वेक्षण ने नीतीश को राष्ट्रीय राजनीति का हीरो माना वहीं शेष भारत ने राहुल को हिन्दुस्तान का हीरो मानने में कतई संकोच नहीं किया। बॉलीवुड का नतीजा सबसे हैरतअंगेज रहा, जहां आमिर और अमिताभ को पछाड़ कर हिन्दुस्तान के हीरो की दौड़ कैटरीना ने जीती।


राष्ट्रीय राजनीति: बिहार में बजा नीतीश का डंका
चुनिए हिन्दुस्तान के हीरो सर्वेक्षण के पहले दिन देश भर से हमें पाठकों के ढेरों की संख्या में मत प्राप्त हुए। बिहार, उत्तरपद्रेश, दिल्ली, गुजरात, मुंबई, उड़ीसा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश से पाठकों ने अपना दिल खोलकर रख दिया। इस सर्वेक्षण में नीतीश कुमार को सबसे ज्यादा 40.464 प्रतिशत मिले, जबकि राहुल गांधी को 33 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। बिहार और झारखंड से नीतीश कुमार को कुल मतों का 62.19 प्रतिशत मिले जबकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली से 11.38 प्रतिशत हासिल हुए। बिहार में जहां नीतीश का डंका बजा तो शेष भारत में राहुल गांधी लोगों की पहली पसंद के रूप में छाए रहे। राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से कुल मतों का 42.987 प्रतिशत मत मिले तो झारखंड और बिहार से उन्हें 25.29 प्रतिशत मत हासिल हुए। मायावती को 10.52 प्रतिशत, मनमोहन सिंह को कुल 5.088 प्रतिशत, और जसवंत सिंह को 1.08 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। मायावती को सबसे ज्यादा मत उत्तरप्रदेश से मिले और वह इस सर्वेक्षण में तीसरे नंबर पर रही। जसवंत सिंह को इस सर्वेक्षण में भले ही 1.08 प्रतिशत वोट मिले हो लेकिन राजस्थान से आए मतों में तकरीबन 60 प्रतिशत मत जसवंत के खाते में गए।


राष्ट्रीय खेल: खेलों में छाए रहे तेंदुलकर और धोनी
सर्वेक्षण के दूसरे दिन खेलों में से अपना हीरो चुनने के लिए लोगों के समक्ष पांच विकल्प दिए गए थे। खेलों में सबसे ज्यादा मत दो दशकों से क्रिकेट की दुनिया के सिरमौर सचिन तेंदुलकर को मिले। पाठकों ने सचिन को 47.92 प्रतिशत वोट दिए। बिहार और झारखंड के कुल 56.83 प्रतिशत पाठकों ने सचिन तेंदुलकर को अपना हीरो चुना तो उ.प्र. और दिल्ली के 30 प्रतिशत पाठकों की पहली पसंद सचिन तेंदुलकर रहे। सचिन के बाद बतौर हीरो धोनी पाठकों की दूसरी पसंद रहे। धोनी को उत्तरप्रदेश और दिल्ली से 26.6 प्रतिशत पाठकों ने अपनी पहली पसंद चुना तो झारखंड और बिहार तो धोनी के प्रशंसक कम नहीं थे। धोनी को बिहार से 26.9 प्रतिशत वोट मिले। बैडमिंटन की दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली साइना नेहवाल को 3.25 प्रतिशत मिले। झारखंड और बिहार से साईना को 14 प्रतिशत तो उत्तर प्रदेश और दिल्ली से उन्हें 7.1 प्रतिशत वोट मिले। विजेंदर और साइना के बीच वोटों का फासला बेहद कम रहा। विजेंदर को 3.25 प्रतिशत मत मिले। मुक्केबाजी की दुनिया में कमाल दिखाने वाले सुरंजय को एक प्रतिशत वोट मिले।


बॉलीवुड: सबको पछाड़ दिया कैटरीना कैफ ने
सर्वेक्षण के तीसरे दिन पाठकों के समक्ष बॉलीवुड से अपना पसंदीदा हीरो चुनने के विकल्प थे। लेकिन इस दिन का परिणाम चौंकाने वाला रहा। अमिताभ, आमिर और अक्षय जैसे अदाकारों के बीच लोगों पर कैटरीना का जादू छाया रहा। सर्वेक्षण में एक रोचक बात यह रही कि अमिताभ और अक्षय कुमार को मिले वोट बराबर निकले। कैटरीना को सबसे ज्यादा 25.50 प्रतिशत मिले। बिहार और झारखंड में कैटरीना के फैन्स का प्रतिशत 25.67 प्रतिशत था तो उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कैटरीना के प्रशसंको का प्रतिशत 32.18 था। सर्वेक्षण में आमिर खान को 14.33 फीसदी वोट मिले और वह कैटरीना के बाद दर्शकों की दूसरी पसंद बने लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार, आमिर से आधे फीसदी कम वोट से भी पीछे थे। अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार दोनों को ही 14.12 प्रतिशत मत मिले। उत्तर प्रदेश में अमिताभ के कद्रदान ज्यादा थे तो दिल्लीवालों का प्यार अक्षर पर बरसा। सर्वेक्षण में आमिर खान को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से 18 प्रतिशत मिले तो बिहार और झारखंड से 13 प्रतिशत फैन्स ने आमिर को अपनी पसंद माना।

 

बिज़नेस: सबका दिल जीत लिया टाटा ने
सर्वेक्षण के चौथे दिन पाठकों के समक्ष हमने बिजनेस क्षेत्र से अपने पसंदीदा हीरो चुनने का विकल्प रखा था। सर्वेक्षण में पाठकों ने रतन टाटा को सबसे ज्यादा मत दिए। ध्यान देने वाली बात ये है कि तकरीबन 50 प्रतिशत पाठकों का बिजनेस की दुनिया में हीरो रतन टाटा है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जहां रतन टाटा को 41 फीसदी वोट मिले तो बिहार और झारखंड से 38 फीसदी लोग टाटा के मुरीद थे। यही नहीं महाराष्ट्र और मुंबई से मिले मतों में से करीब 57 फीसदी लोग रतन टाटा को अपना हीरो मानते हैं। रतन टाटा के बाद इस फेहरिस्त में दूसरा नंबर मुकेश अंबानी का था। 11.34 फीसदी लोगों की पहली पसंद मुकेश अंबानी थे। मुकेश अंबानी को बिहार और झारखंड से दस फीसदी पाठकों ने अपना हीरो चुना तो उत्तर प्रदेश और दिल्ली से 10.67 प्रतिशत पाठक मुकेश के मुरीद थे। घोटालों में फंसी सत्यम कंपनी को उबार कर सबके चहेते बने आनंद महिंद्रा इस सूची में तीसरे नंबर पर रहे। आनंद को 5 प्रतिशत पाठकों ने पहली पसंद माना। बिहार और झारखंड के 4 प्रतिशत पाठक आनंद के प्रशंसक थे तो उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 2 प्रतिशत। आनंद के बाद तालिका में क्रमश: चंदा कोचर और शिव नाडर थे लेकिन दोनों के मतों का अंतर आधा फीसदी था। चंदा कोचर को 3.95 प्रतिशत तो शिव नाडर को 3.26 प्रतिशत मत हासिल हुए।


चर्चित हस्तियां: ओबामा के कद्रदान सबसे ज्यादा
सर्वेक्षण के अंतिम दिन पाठकों को मशहूर अंतरराष्ट्रीय हस्तियों में से अपने पसंदीदा हीरो का चुनाव करना था। लोगों के समक्ष पांच विकल्प थे। लेकिन निर्विवाद तौर पर बराक ओबामा लोगों के पसंदीदा हीरो बनकर उभरे। टाटा की ही तर्ज पर बराक को 40 फीसदी से भी ज्यादा जनता ने अपना हीरो माना। इस दिन बराक के अलावा कोई भी हस्ती दहाई में अंक प्राप्त नहीं कर सकी। बराक को 42.13 प्रतिशत वोट मिले। उनके बाद दूसरे नंबर पर रहे आर्सेलर मित्तल के सीईओ और चेयरमैन एल.एन.मित्तल। हालांकि मित्तल और ओबामा के मतों के बीच फासला लंबा था। एल.एन. मित्तल को 5.56 प्रतिशत वोट मिले। इसके बाद लोगों की पसंद बने सारथ फोन्सेका। फोन्सेका को 4.84 प्रतिशत वोट मिले तो फर्राटा धावक उसेन बोल्ट को 3.63 फीसदी वोट। स्लमडॉग मिलेनियर से दर्शकों की पसंद बने डेनी बोएल को 2.42 प्रतिशत पाठकों ने अपना हीरो चुना।

 


सचिन तेंदुलकर: क्रिकेट का बादशाह

सर्वेक्षण में खेल की दुनिया में लोगों की पहली पसंद बने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर। दो दशकों से भारतीय बल्लेबाजी की धुरी रहे सचिन तेंदुलकर को 47.92 प्रतिशत मत मिले, जो इस बात के गवाह हैं कि देश की आधी जनता की नजर में सचिन सबसे बड़े हीरो हैं। आखिर हो भी क्यों न, रिकार्डों के बादशाह के नाम से मशहूर तेंदुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बीस बरस पूरे करने के अलावा वनडे क्रिकेट में 17000 और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30000 रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी हैं। श्रीलंका के खिलाफ अहमदाबाद के मोटेरा के सरदार पटेल स्टेडियम पर कदम रखते ही तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट में 20 बरस पूरे करने वाला पहला भारतीय बल्लेबाज बनने का गौरव पाया। क्रिकेट में दो दशक से से भी ज्यादा का सफर बिता चुके सचिन विवादों में कभी नहीं फंसे। सचिन को जब उनकी उम्र और चोटों की वजह से चुका हुआ कहा गया तो सचिन ने उसका जबाव अपने बल्ले से दिया। कई मैचों में अपने बलबूते भारतीय क्रिकेट की नैया पार कराने वाले तेंदुलकर के प्रशसंक दुनिया भर में हैं। क्रिकेट की दुनिया के महानतम तेज गेंदबाजों में से ग्लैन मैकग्रा ने एक बार सचिन के बारे में कहा था कि वह बल्ले को ऐसे पकड़ते हैं जैसे टूथपिक पकड़ते हैं। सचिन ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी गेंद को सीमारेखा तक पहुंचाने का माद्दा रखते हैं। आप सचिन की महानता की क्षमता इसी से तौल सकते हैं कि क्रिकेट की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिरकी गेंदबाजों में से एक शेनवॉर्न ने कहा था कि मुझे सपने आते हैं कि मेरी गेंदों वह छक्के जड़ रहा है।


नीतीश के हीरो होने के मायने
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हिन्दुस्तान का हीरो चुना जाना एक बड़ी खबर है। खास तौर पर जब  उनकी लोकप्रियता कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी से भी काफी आगे हो। विशेष एसएमएस सर्वेक्षण से पता चलता है कि बिहार को विशेष पहचान दिलाने की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल को राज्य से बाहर भी स्वीकृति मिल रही है। तभी तो हिन्दी पट्टी के दूसरे राज्यों में भी उनकी पहचान बनी है। यहां तक कि पंजाब और हरियाणा के पाठकों ने भी उनके काम को हीरो के लायक माना है। राज्य में सड़क, शिक्षा, कानून-व्यवस्था, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य और सड़क के मामले में जो सुधार हुआ है उसे लोग स्वीकार कर रहे हैं। यह इसलिए भी कि नीतीश कुमार को जो बिहार मिला था, उसमें सड़कों की हालत खराब थी। अस्पताल बदहाल थे और कानून-व्यवस्था की हालत ऐसी थी कि दूसरे राज्यों के लोग बिहार आने से परहेज करने लगे थे। केंद्र की मदद के बगैर राज्य सरकार ने अपने साधनों से सड़क की बदहाली दूर की। स्पीडी ट्रायल के जरिए अपराधियों को सजा दिलवाई। इस अवधि में प्रकृति ने कभी सरकार का साथ नहीं दिया। पिछले साल कोसी में बाढ़ की शक्ल में भारी विपदा आई तो इस साल राज्य सूखे की मार झेल रहा है। बाढ़ राहत के मामले में भी राज्य सरकार को केंद्र से अधिक मदद नहीं मिली। सर्वेक्षण का विश्लेषण बताता है कि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी भी लोकप्रियता के हिसाब से काफी आगे रहे हैं। वे युवाओं की पसंद हैं। सर्वेक्षण का एक कोना यह भी है कि इसमें युवाओं और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह वर्ग भावी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। यानी आनेवाले दिनों में भी नीतीश कुमार और राहुल गांधी का राजनीतिक वर्चस्व कायम रहेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह चुनौती भी है। सोनिया गांधी और डा. मनमोहन सिंह के कांग्रेस को वे भले ही बिहार में न पनपने दें लेकिन राहुल के कांग्रेस को वे नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह भी एक वजह है कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के बाद बिहार पर नजर रखे हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि अगले साल होनेवाले बिहार विधानसभा के चुनाव के समय राहुल गांधी बिहार में सक्रिय रहेंगे। झारखंड में बहुत हद तक राहुल गांधी ने अपना जादू दिखाया। वे पार्टी के युवा चेहरा हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को फिर से जीवित किया।

 

राहुल गांधी ‘असली हीरो’
हिन्दुस्तान के हीरो के लिए हुए मत सर्वेक्षण में बिहार को छोड़कर शेष भारत में यदि लोगों की जुबान पर राहुल गांधी का नाम है तो यह मात्र संयोग नहीं है। कुल मतों में 33 फीसदी मत उन्हें देकर हमारे देश भर में फैले पाठकों ने उनके अव्वल राजनीतिज्ञ होने पर अपनी स्वीकृति की मोहर लगा दी है। इसकी बानगी यूपी और दिल्ली के आंकड़े देते हैं जहां उन्हें करीब 43 फीसदी मत मिले हैं। राहुल जो कुछ भी करते हैं, वह लीक से हटकर ही होता है। यही वजह है कि आए दिन वे किसी न किसी खूबी के लिए चर्चा में रहते हैं। वे हिन्दुस्तानी जिन्दगी से साक्षात्कार करने के इरादे से कभी किसी दलित की कुटिया में जाकर रात गुजारते हैं तो कभी सुरक्षा घेरे को धता बताकर दूर से उम्मीदें बांधते किसी गरीब की फरियाद खुद उस गरीब के करीब जाकर तन्मयता से सुनते हैं। न सिर्फ सुनते हैं, बल्कि उसकी परेशानी दूर करने का हर संभव प्रयास भी फौरन करते हैं। उनकी तेज तर्रार अंदाज में कार्य करने की शैली ने बूढ़ी होती पार्टी में नए रक्त का संचार किया है। बोले तो देश की नई पीढ़ी का नेतृत्व उन्होंने एकछत्र अंदाज में संभाला है। भले ही राहुल को राजनीति विरासत में मिली है। लेकिन उन्होंने कांग्रेस की उस परंपरा को नहीं अपनाया जिसमें सत्ता-सुख भी विरासत के उपहार की तरह मिल जाता। उन्होंने विनम्रता से अति उत्साही कांग्रेसियों के उस प्रस्ताव को साफ ठुकराया जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री या कैबिनेट मंत्री बनाने की वकालत की गई थी। राजनीति में सक्रिय होने के बाद 2004 में अमेठी से लोकसभा का चुनाव लड़कर जीतने वाले राहुल ने पूरे देश में घूम-घूम कर इस देश के राजनीति दर्शन को अपने ढंग से समझने का काम किया और उसके बाद ही पार्टी का महासचिव पद संभाला। अपनी पार्टी में भी चाटुकारों से दूर रहने की खास नीति राहुल ने अपनाई। इसके बाद देश के युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने में उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। राजनीति में ईमानदारी का शालीन स्वर है जो उनके कद को ऊंचा करता है। नरेगा, आरटीआई, युवा हित और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार उनकी प्राथमिकताओं में सरे फेहरिस्त हैं। समस्याओं और कमियों को वे छुपाते-दबाते नहीं, बल्कि उसका रचनात्मक समाधान सुझाते नजर आते हैं। शायद यही वजह है कि वे भावी हिन्दुस्तान के सबसे पसंदीदा राजनैतिक हीरो बनकर उभरे हैं।

 

बराक ओबामा अंतरराष्ट्रीय हीरो

हिन्दुस्तान के सर्वेक्षण में हमने अंतरराष्ट्रीय फलक पर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हस्तियों संबंधी विकल्प अपने पाठकों को दिए थे। यह हस्तियां थीं अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, स्लमडॉग मिलिनेयर के निर्देशक डैनी बॉयल, फर्राटा दौड़ के विश्व चैंपियन उसेन बोल्ट, भारतीय मूल के स्टील किंग लक्ष्मीनिवास मित्तल और श्रीलंका में शांति प्रक्रिया में अग्र भूमिका निभाने वाले सरथ फोंसेका। हमारे पाठकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अपनी पहली पसंद घोषित किया और उन्हें 42.13 मत मिले। बराक ओबामा को इतनी बड़ी संख्या में पाठकों के वोट मिलने के कई कारण हैं जिसका सबसे बड़ा कारण संभवत: उनकी साफ और लीक से हटकर बनी छवि रही है। अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बनने के साथ-साथ उन्होंने विश्व शांति के बारे में कई नए प्रस्ताव भी रखे।

उन्होंने अपने आदर्शो में महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग का नाम लिया। गत वर्ष ओबामा के राष्ट्रपति पद संभालने मात्र के फौरन बाद ही समूची दुनिया को नई उम्मीद की आस बंधनी शुरू हो गई थी। हालांकि सबसे बड़ी हैरानी तो तब हुई जब नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने उन्होंने वर्ष का शांति नोबेल देने की घोषणा की। यह घोषणा स्वयं राष्ट्रपति ओबामा को भी हैरान कर गई थी। दुनिया के समक्ष उन्होंने कहा कि मात्र दस माह के कार्यकाल में ही उन्हें इस अति महत्वपूर्ण पुरस्कार के लिए चुना जाना हैरानी की बात है, लेकिन वह अपने पूर्ववर्ती विजेताओं और नोबेल कमेटी का आदर करते हुए यह पुरस्कार स्वीकार करेंगे और संपूर्ण पुरस्कृत राशि दान में देंगे। नोबेल पुरस्कार स्वीकार करने के बाद उन्होंने वहां दिए अपने भाषण में कहा कि शांति स्थापना के लिए कई बार युद्ध बहुत जरूरी हो जाता है और आज ऐसा ही समय है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध किसी एक देश या समाज के खिलाफ न होकर उन कुछ सिरफिरों के खिलाफ है जो अपनी कट्टरवादी मानसिकता के आगे और कुछ नहीं देख पाते। अपने अभी तक के लगभग एक वर्ष के शासनकाल के दौरान बराक ओबामा ने इससे पूर्व अमेरिका में नया मेडिकल बिल भी पेश किया था।


भारतीय इंडस्ट्री के कोहिनूर
72 वर्षीय रतन टाटा भारतीय इंडस्ट्री के कोहिनूर हैं। उनकी ख्याति बैलेंसशीटों और विलय-अधिग्रहण की कहानियों से आगे जाती है। उनकी लोकप्रियता फोर्ब्स या फार्च्यून लिस्ट की मोहताज नहीं, यह इस बात से जाहिर है कि उन्होंने एक बार फिर मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए नंबर एक का खिताब हासिल किया। पिछली बार भी हिन्दुस्तान के पाठकों ने उन्हें इंडस्ट्री का अपना हीरो नंबर वन चुना था। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि ताज मुंबई पर हुए हमले के बाद उनका एक बेहद संयत और जुझारू चेहरा देश और दुनिया ने देखा है। उनकी एक छवि देश के आम आदमी के लिए नैनो जैसी किफायती और आधुनिक कार देने वाले राष्ट्रनायक उद्योगपति वाली भी है। गौरतलब है कि उन्हें अपने निकटतम प्रतियोगी मुकेश अंबानी (11.13) के मुकाबले लगभग चार गुना वोट (49.14) प्रतिशत मिले हैं। पिछले साल फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें भारत के सबसे सम्मानित बिजनेसमैन करार दिया था। इस सर्वेक्षण में नंबर दो पर रहने वाले बिजनेसमैन मुकेश अंबानी भी कई मायनों में विलक्षण हैं। हाल में उन्हें भारत के सबसे पावरफुल औद्योगिक हस्ती का खिताब दिया गया था। वे कई वर्षों से दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की गिनती में शुमार किए जा रहे हैं। इसी तरह संकटग्रस्त सत्यम कंप्यूटर्स के अधिग्रहण के बाद मीडिया की सुर्खियों पर छाने वाले आनंद महिंद्रा को पाठकों के लगभग पांच प्रतिशत मत मिले हैं। आईसीआईसीआई समूह की चंदा कोचर को हिन्दुस्तान के लगभग 4 फीसदी पाठकों ने वर्ष 2009 के लिए बिजनेसजगत का हीरो माना है।


कैटरीना : बॉलीवुड का नगीना
हिन्दुस्तान के सर्वेक्षण में दिलचस्प रूप से हमारे पाठकों ने कैटरीना कैफ को हिन्दुस्तान का नगीना बताया। कैटरीना को इस सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा 25.50 फीसदी मत मिले। मिस्टर परफेक्शनिस्ट की छवि वाले आमिर खान 14.33 फीसदी मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे। पिछले लगभग चालीस सालों से लगातार अभिनय कर रहे अमिताभ बच्चन ने युवाओं को टक्कर देते हुए अक्षय कुमार के बराबर 14.12 फीसदी मत हासिल किये। भारतीय संगीत को विश्व फलक तक ले जाने वाले और आस्कर पुरस्कार जीतने वाले संगीतकार एआर रहमान को 9.41 फीसदी मत मिले। यह इस बात का संकेत भी है कि भारतीय जनमानस शायद संगीत के प्रति अभी बहुत ज्यादा गंभीर नहीं हुआ है। लेकिन कैटरीना का नंबर वन का सिंहासन हासिल करना इसलिए भी अहम है क्योंकि वह ब्रिटेन की नागरिक हैं। उनकी मां ब्रिटिश मूल की और पिता कश्मीरी भारतीय मूल के हैं।

बॉलीवुड में उन्हें बैड ब्वॉय के नाम से जाने जाने वाले सलमान खान लेकर आए। उन्होंने ही कैटरीना को अभिनय और प्रेम के शुरुआती सबक सिखाये। सन 2003 में बूम फिल्म से उनका अभिनय सफल शुरू हुआ। विदेशी मूल की होने के मुद्दे को पीछे छोड़ते हुए कैटरीना ने महज छह साल में ही कई हिट फिल्में दीं। नमस्ते लंदन, वैलकम, सिंह इज किंग, रेस, अजब प्रेम की गजब कहानी, हैलो, युवराज, दे दनादन जैसी फिल्मों ने कैटरीना की छवि एक अच्छी अभिनेत्री की बनाई हो या ना बनाई हो लेकिन वह फिल्म निर्माताओं के लिए लकी मानी जाने लगीं। खुद को लगातार परिपक्व करने के लिए कैटरीना ने हिंदी सीखी, डांस सीखा और सीखा बॉलीवुड में किस तरह रिश्तों को बनाया और बचाया जाता है।

मजेदार बात है कि सलमान खान की प्रेयसी की अपनी छवि को भी कैटरीना ने कभी अपने प्रोफेशन पर हावी नहीं होने दिया। जब हर जगह सलमान और कैटरीना की शादी को लेकर चर्चाएं होती रहीं तब भी कैटरीना ने मुस्कारकर इन सवालों को टाला। छरहरा बदन, निर्दोष सा सौंदर्य, सीखने की ललक, विवादों से बचे रहना और प्रोफेशनल एटीट्यूट रखते हुए कैटरीना ने खुद को सलमान की परछाई होने के टैग से इस दौरान मुक्त किया। और सबसे मजेदार बात यह कि वे किसी लॉबी में होने से भी लगातार बचती रहीं। उन्होंने अक्षय कुमार के साथ काम किया और युवा रणबीर कपूर के साथ भी। सन 2010 में भी कैटरीना की कई बड़ी फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। इनमें प्रकाश झा की राजनीति, 7 डेज इन पेरिस और अनुराग बसु की एक फिल्म है जिसका शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है। बेशक दर्शकों ने परदे पर उनकी कैमिस्ट्री अक्षय कुमार के साथ सबसे ज्यादा पसंद की। कैटरीना के क्रेडिट में एक और सबसे अहम काम जाता है, वह यह कि उन्होंने बॉलीवुड में अपने कदम जमाकर यह साबित किया है कि अभिनय की दुनिया में अब सरहदें कोई अर्थ नहीं रखती। शायद इसी चीज ने उन्हें हिंदुस्तान का नगीना चुना है।

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