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कर्मचारियों के वेतन वृद्धि पर लोस और रास में मतभेद

कर्मचारियों के वेतन वृद्धि पर लोस और रास में मतभेद

अपने करीब चार हजार कर्मचारियों के वेतन में अतिरिक्त बढ़ोतरी के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों के प्रशासन ने ठीक विपरीत रुख अपना लिया है।

राज्यसभा के महासचिव वीके अग्निहोत्री ने बताया कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस सदन को सलाह दी है कि वेतन में दो वृद्धि देना उचित नहीं है। इसके एक दिन पहले लोकसभा में अग्निहोत्री के समकक्ष पीडीटी अचारी ने जोर देकर कहा था कि लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार को ऐसा करने का सर्वाधिकार हासिल है।

अग्निहोत्री ने कहा कि दोनों सदनों के वेतन ढांचे पर फैसला लेने वाली संसद की वेतन समिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और वित्त मंत्री की सलाह पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कुछ संशोधनों के बाद राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी और लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा संयुक्त रूप से अनुमोदित वेतन समिति की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वेतन वृद्धि पर कोई संयुक्त सहमति नहीं बनी है।

अग्निहोत्री ने कहा कि संसदकर्मियों के लिए वेतन समिति का तंत्र इसलिए बनाया गया है, क्योंकि उनकी कार्यस्थितियां अन्य सरकारी कर्मचारियों के मुकाबले अलग हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मुखर्जी ने लोकसभा सचिवालय से सिर्फ इतना कहा था कि वेतन में किसी तरह का बदलाव मंत्रालय के अधीन प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। दूसरी ओर, लोकसभा के सूत्रों ने इस मामले पर वित्त मंत्रालय की किसी भी आपत्ति के प्रति अनभिज्ञता जताई है।

अचारी ने जोर देकर कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ही इस मामले पर फैसला लेने की सर्वोच्च प्राधिकारी हैं। ऐसा कुछ निश्चित विसंगतियों को दूर करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभाध्यक्ष को संविधान तथा संबंधित अन्य नियमों के कुछ निश्चित प्रावधानों के तहत इन मुद्दों पर फैसला लेने की स्वायत्तता हासिल है।
अचारी ने कहा कि लोकसभा का बजट सचिवालय द्वारा अंतिम रूप से तैयार किया जाता है जिस पर सदन का अध्यक्ष अनुमोदन देता है।

उन्होंने कहा कि ऐसा विसंगतियों को खत्म करने के लिए किया गया है। लोकसभाध्यक्ष को इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय या संसदीय मामलों के मंत्रालय से सलाह-मशविरा करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्हें सर्वोच्च प्राधिकार हासिल है।

अचारी ने कहा है कि वेतन तय होने के बाद सचिवालय को कुछ निश्चित गड़बड़ियों के बारे में पता लगा। उसके बाद यह सुझाव दिया गया कि कैडर समीक्षा के लाभ से वंचित रह गए संसदकर्मियों को दो अतिरिक्त वेतन अभिवृद्धियां दी जानी चाहिए।

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