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है कोई जो बाल बाँका करे घोटालेबाजों का

महिला कल्याण और समाज कल्याण जैसे महकमों में करोड़ों का घोटाला करने वाले सरकारी और गैर सरकारी लोगों के खिलाफ कार्रवाई का डंडा फिलहाल ठंडा पड़ा है। जाँच में आरोप सिद्ध होने के बाद भी लखनऊ में जिला प्रोबेशन दफ्तर और जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को अभी तक निलंबित नहीं किया गया है।  प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद प्रशासन और शासन स्तर पर घोटालेबाजों के प्रति यह सहानुभूति आश्चर्यजनक मानी जा रही है।

विधवा पेंशन और महिला व समाज कल्याण से जुड़ी कई अन्य योजनाओं के नाम पर किए जा रहे इस घोटाले का खुलासा ेगत 17 सितम्बर को ‘हिन्दुस्तान’ ने किया था। घोटालेबाजों ने सरोजनीनगर के ऐन गाँव की पंजाब नेशनल बैंक व कई अन्य बैंकों की शाखाओं में जिला कचहरी से लाभार्थियों की फर्जी सूची भेजकर लाखों रुपया निकाल लिया था। खबर छपने के बाद मामले की जाँच हुई।

जिला प्रोबेशन विभाग से जुड़े एक पूर्व जिला प्रोबेशन अधिकारी, एक महिला उर्दू अनुवादक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भूमिका सामने आई। इसके अलावा जिन लोगों के खातों से फर्जी तरीके से पैसा निकाला गया था, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रमुख सचिव समाज कल्याण की ओर से इस मामले की जाँच विजिलेंस को सौंपी गई पर कोई जाँच शुरू नहीं हुई।

सीडीओ लखनऊ कौशलराज शर्मा का कहना है कि प्रोबेशनकर्मियों के खिलाफ उन्होंने विभागीय जाँच की संस्तुति की है पर तीन महीने बीत जाने के बाद भी यह कर्मचारी अपनी पुरानी कुर्सियों पर जमे हैं। उन्हें निलंबित नहीं किया गया है। इस तरह पूर्व जिला प्रोबेशन अफसर पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सूत्रों का कहना है कि शासन और प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करने से डर रहा है क्योंकि इसमें कुछ प्रभावशाली अधिकारी भी शामिल हैं। दिलचस्प यह है कि इस मामले के खुलासे के बाद प्रशासन ने जब अन्य योजनाओं की जाँच कराई तो बड़े-बड़े घोटाले सामने आए पर किसी भी मामले में आरोपित लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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