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ई-गवर्नेस से रिश्वतखोरी कम होगी

मुख्यमंत्री मायावती की समीक्षा बैठक के बाद शासन ई-गवर्नेंस के कार्योँ में तेजी लाने में जुट गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए साल से इसमें खासी तेजी आएगी। खासतौर से शासन की कोशिश होगी कि जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र भी जिलों में ई-गवर्नेस के जरिए बनें।

क्योंकि इन प्रमाण पत्रों के बनवाने में तहसीलों में रिश्वतखोरी की काफी शिकायतें शासन के पास आती हैं। ई-गवर्नेस के कार्यो को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए शासन स्तर पर लखनऊ में डाटा सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

टेंडर लेने में माफिया और गुंडे हावी न हों इसके लिए ई-टेंडरिंग के डाक्यूमेंट्स को बैंकों के जरिए वितरित कराया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को ई-टेंडरिंग के संबंध में ट्रेनिंग भी दी जाएगी। ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना अभी कुल छह जिलों में लागू है, लेकिन अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की कोशिश शुरू की जा रही है।

ई-गवर्नेस के जरिए राजस्व, श्रम, पंचायती राज, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रशासनिक सुधार, खाद्य एवं रसद, समाज कल्याण, महिला कल्याण एवं बाल विकास, विकलांग कल्याण, ग्राम्य विकास, निर्वाचन, स्टैम्प एवं रजिस्ट्रेशन, कृषि, बेसिक, माध्यमिक, उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, ऊर्जा, नियोजन, वाणिज्यकर, सहकारिता, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, गन्ना एवं चीनी उद्योग आदि विभागों से संबंधित आम लोगों की सेवाएँ उन तक पहूंचाने के लिए जन सेवा केंद्रों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है।

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