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नए साल के लिए

साल के आखिर दिन दो बाते होती हैं। एक तो आप पछताते हैं कि पिछले साल आपने जो संकल्प लिए थे उन्हें पूरा नहीं कर सके। सोचा बहुत कुछ था हुआ कुछ भी नहीं। जितना तय किया था उतनी कोशिशें नहीं की और जितना चाहा था उतना हासिल नहीं कर सके। दूसरी चीज यह होती है कि आप अगले साल के बारे में सोचते हैं। कुछ नए संकल्प गांठते हैं, साथ ही यह भी पिछली बार जो गलतियां की थीं इस बार न हों। तो नए साल का संकल्प कैसे गांठा जाए कि वह पूरा हो सके? क्या गांठा जाए? ऐसा क्या किया जाए कि साल बीतते बीतते मन में कोई संताप न बचे?

आमतौर पर नए साल के संकल्प दो तरह के होते हैं। एक तो अपनी बुरी आदतों को छोड़ने के, जैसे इस साल मैं सिगरेट पीना छोड़ दूंगा, या इस साल मैं अपने गुस्से पर काबू रखने की कोशिश करूंगा। दूसरी तरह के संकल्प होते हैं नए लक्ष्य हासिल करने के, जैसे साल मैं इतनी रकम पाऊंगा, या परीक्षा में कामयाब होऊंगा।
इस तरह के संकल्पों के साथ साल के अंत में पछताने के जोखिम ज्यादा होते हैं। थोड़ी सी कसर रह जाए तो लक्ष्य हाथ से फिसल जाता है। ऐसे में किया क्या जाए?

सबसे पहले जरूरी यह है कि अपनी क्षमताओं का आकलन किया जाए। अगर आपको जरा सा भी लगता है कि आपको सिगरेट छोड़ने में दिक्कत आ सकती है तो इसे नए साल का संकल्प न बनाए। यह काम फरवरी, मार्च या कभी और भी किया जा सकता है। नए साल का संकल्प अगर टूटता है तो यह साल भर लंबा अपराध बोध भी देता है। इसके बजाए कुछ सकारात्मक संकल्प बनाए जा सकते हैं। जैसे आप किताबों की एक सूची बनाएं, तय करें कि इस साल मैं यह दस किताबे पढ़ूंगा। लक्ष्य पूरा न हुआ तो साल के बाद आपके पास यह संतोष रहेगा कि आपने कम से कम छह किताबें तो पढ़ लीं। ऐसे संकल्प आपको खुश भी रखेंगे और भविष्य के लिए नया आत्मविश्वास भी देंगे।

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