अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जाली प्रमाणपत्र से शिक्षक बनी शिक्षामित्र, बर्खास्त

संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों से जाली प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षा विभाग में नौकरी करने वालों की फेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। उ.प्र. माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव की जांच में डोभी ब्लाक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय छोटी मढ़ी में ऐसे ही एक फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां तैनात शिक्षामित्र श्रीमती सुनीता पाल को बीएसएस ने बर्खास्त कर दिया है।

दरअसल फर्जीवाड़े का यह खेल उत्तर मध्यमा द्वितीय वर्ष यानि इंटर मीडिएट के प्रमाण पत्र को लेकर खेला गया। प्राथमिक विद्यालय छोटी मढ़ी में शिक्षामित्र के रिक्त पड़े एक पद के लिए विभाग ने आवेदन पत्र मांगा तो सुनीता पाल, आराधना सिंह, हंसादेवी, रीना सिंह, रीना यादव, अनीता सिंह, अर्चना सिंह, मीरा देवी समेत आठ आवेदन पत्र आये।

लेकिन सर्वोच्च अंक होने के बाद भी हंसादेवी यादव पत्नी संतोष कुमार यादव निवासी ग्राम मढ़ी का चयन इसलिए निरस्त हो गया, क्योंकि सुनीता पाल पत्नी सुबाष पाल का अंक उससे ज्यादा रहा। उधर सुनीता पाल द्वारा जाली प्रमाण पत्र लगाकर चयन कराने की बात धीरे-धीरे गांव में फैल गयी।

इसके बाद हंसा देवी ने उ.प्र. माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की प्रदेश सचिव श्रीमती शैल यादव से राज्य मुख्यालय लखनऊ में शिकायत की, जिसके आधार पर उन्होंने सुनीता पाल द्वारा वर्ष 2004 में अनुक्रमांक 901897 कुबेर संस्कृत माध्यमिक विद्यालय परसौड़ी चन्दवक से उत्तर मध्यमा द्वितीय वर्ष उतीर्ण करने के बाबत बीएसए धीरेन्द्रनाथ सिंह से जांच करायी तो आरोप सही पाये गये।

विद्यालय प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, उक्त अनुक्रमांक की यह छात्र 2004 में यहां से उत्तर मध्यमा की परीक्षा में ही शामिल नहीं हुई थी। लिहाजा उसके द्वारा लगाये गये प्रमाण पत्र पूरी तरह जाली हैं। इसे संज्ञान में लेते हुए बीएसए धीरेन्द्रनाथ सिंह ने शिक्षामित्र श्रीमती सुनीता पाल को बर्खास्त करते हुए उनके खिलाफ बुधवार को चन्दवक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जाली प्रमाणपत्र से शिक्षक बनी शिक्षामित्र, बर्खास्त