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आओ मिलकर करें गंगा को निर्मलः जयराम रमेश

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने स्पष्ट कहा, गंगा पर अब और नए बांध नहीं बनेंगे। उत्तराखंड में प्रस्तावित बांधों के निर्माण की शर्त पर गंगा की अविरल धारा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। बताया, वाराणसी एवं इलाहाबाद में नए सीवरेज प्लान को मंजूरी दे दी गयी है।

वाराणसी में जापान सरकार की मदद से 490 करोड़ रुपए फरवरी में रिलीज होंगे, जबकि इलाहाबाद में 336 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कहा, अभियान-2020 को जनांदोलन से ही साकार किया जा सकता है। यदि सभी मिलकर कदम उठाएं, तो गंगा की अविरल और निर्मल धारा हकीकत बन सकेगी। जरूरत है आपसी मतभेद भुलाने, दलगत विचारों को त्यागने और हमकदम हो गंगा स्वच्छता अभियान से  जुड़ने की।

गंगा और तट का सौंदर्य अप्रतिम है, पर गंदगी और प्रदूषण इसे निगल रहे हैं। इसे रोकना सरकार या अफसरों की ही नहीं, हम सब की जिम्मेदारी है, तभी सफलता मिलेगी। श्री रमेश काशी में गंगा तटों का निरीक्षण करने के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

बांधों की बाबत श्री रमेश ने बताया, निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्ट लोहारीनाथ पाला की रिपोर्ट प्रधानमंत्री के पास है। इसे बिल्कुल रद करने का इरादा नहीं है, बल्कि बीच का रास्ता निकाला जाएगा। लोहारीनाथ प्रोजेक्ट पर चूंकि एनटीपीसी के 600 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, इसलिए इस पर विचार करना पड़ रहा है।

सर्किट हाउस में पत्रकारों से बोले, हालांकि उत्तराखंड सरकार बांधों का निर्माण रोके जाने के खिलाफ है। लेकिन लोहारीनाथ पाला बांध से 16 क्यूमेक पानी छोड़ा जाएगा। इससे कम से कम छह महीने तक गंगा की अविरल धारा बाधित नहीं होगी।

तुलसी घाट पर संकट मोचन फाउण्डेशन के साथ बैठक करने के बाद श्री रमेश पत्रकारों से बोले, वर्ष 2020 तक गंगा का जल न केवल निर्मल होगा, बल्कि उसका प्रवाह भी अविरल होगा। मेरी योजना के अनुसार वर्ष 2014 तक गंगा में गिरने वाले मल-मूत्र और नाले बंद हो जायेंगे।

इस दौरान गंगा में औद्योगिक कचरे का गिरना भी रोक लिया जाएगा। इसके लिए 15 हजार करोड़ रुपये की योजना है। फिर स्पष्ट किया, गंगा निर्मलीकरण अभियान न तो राजनीतिक है और न ही सरकारी। यह मानव जाति के उत्थान के लिए उठाया गया कदम है और सभी की सहभागिता व जनांदोलन से ही इसे अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।

बताया, एक सर्वे में पाया गया है कि गंगा और अन्य नदियों में प्रदूषण की मात्र दो पार्ट में होती है। नगरीय गंदगी से 70 फीसदी और शेष औद्योगिकी उत्पादन इकाइयों से निकले कचरों और केमिकलयुक्त जल से। सच्चई यह भी है कि औद्योगिक कचरे ज्यादा घातक हैं। इस मामले में 90 औद्योगिक क्लस्टर चिह्नित किये गए हैं। ऐसी जगहों पर विशेष संयंत्र लगाकर इनके कचरे से प्रदूषण की मात्र दूर की जायेगी।

एक सवाल के जवाब में बोले, देखिये.. बगैर योजना के तो कुछ भी नहीं किया जा सकता। मैं जोर देकर कहता हूं कि यह योजना सरकारी नहीं है। प्रथम चरण के तहत विजुअल डेवलपमेंट किया जायेगा। इसके तहत गंगा तटों को खूबसूरत और भव्य स्वरूप प्रदान किया जायेगा, ताकि सफाई और अभियान दिखे और जनसभागिता बढ़े। एक अन्य सवाल पर कहा, सच है कि बांध बनाये जाने से गंगा का प्रवाह बाधित हुआ है।

गंगा को रोककर जगह-जगह चल रहे हाइड्रो प्लांट से होन वाले लाभ-हानि का आकलना किया जाना भी जरूरी है। उन्होंने बताया, सरकारी और संकट मोचन फाउण्डेशन की ओर से दिए गए प्लान का तकनीकी आकलन जरूरी है, ताकि सही परिणाम मिले।

इसके लिए एक कमेटी गठित की गई है। इसमें श्री वीरभद्र मिश्र, प्रो. एसएन उपाध्याय, प्रो. एसके मिश्र, डा. एसके संड के साथ ही जल निगम, सिंचाई विभाग और नगर निगम के विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। कमेटी का कार्य सरकारी और फाउण्डेशन की ओर से तैयार प्रोजेक्ट के बीच तालमेल बिठाना और गंगा अभियान-2020 को उचित आधार देना है। कमेटी से तीन महीने में रिपोर्ट अपेक्षित है।

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