अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

झारखंड के अब तक के सभी मुख्यमंत्री आदिवासी

झारखंड विधानसभा में 44 सीटें अनारक्षित हैं लेकिन वर्ष 2000 में गठित इस राज्य के अब तक के चारों मुख्यमंत्री आदिवासी ही बने हैं। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेने वाले शिबू सोरेन भी आदिवासी हैं। विधानसभा में 81 में से 29 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं और आठ अनुसूचित जातियों के लिए। 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ था तब भाजपा के बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे। मतभेद के कारण राजग के घटक दलों की मांग के बाद मरांडी को पद से हटना पड़ा, जिसके बाद 18 मार्च 2003 को एक अन्य आदिवासी नेता अर्जुन मुंडा को राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गयी।

2005 में त्रिशंकु विधानसभा के बाद तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने शिबू सोरेन को दो मार्च 2005 को तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। सोरेन अपना बहुमत साबित करने में विफल रहे और नौ दिनों के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राजग ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। शिबू सोरेन के इस्तीफे के बाद 13 मार्च 2005 को अर्जुन मुंडा को दूसरी बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गयी ।
अर्जुन मुंडा की सरकार के पतन के बाद निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा के नेतत्व में 18 सितंबर 2006 को नयी सरकार बनी। काफी खींचतान के बाद मधु कोड़ा की सरकार गिर गयी और 27 अगस्त 2008 को शिबू सोरेन ने दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की ।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:झारखंड के अब तक के सभी मुख्यमंत्री आदिवासी