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राठौर के खिलाफ सात सदस्यीय एसआईटी करेगी जांच

राठौर के खिलाफ सात सदस्यीय एसआईटी करेगी जांच

छेड़छाड़ की शिकार रूचिका गिरहोत्रा के पिता और भाई की शिकायत के आधार पर पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर और अन्य के खिलाफ दर्ज दो मामलों की जांच के लिए हरियाणा पुलिस ने बुधवार को सात सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया।

पुलिस महानिदेशक आरएस दलाल ने एसएस कपूर की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया। कपूर हरियाणा पुलिस में पुलिस महानिरीक्षक (सुरक्षा) हैं। इसमें दो महिला अधिकारी समिति चौधरी और लक्ष्मी देवी भी शामिल हैं। चौधरी पंचकूला में पुलिस उपाधीक्षक और लक्ष्मी राज्य अपराध शाखा में निरीक्षक हैं।

डीजीपी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, आईपीएस अधिकारी एस एस कपूर सुनिश्चित करेंगे कि जांच का काम तेजी से किया जाए। दोनों प्राथमिकियां पंचकूला पुलिस स्टेशन के सेक्टर पांच में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गईं। इसमें रूचिका के भाई आशु की हत्या का प्रयास, उत्पीड़न और उसके भाई को गलत मामलों में फंसाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ शामिल है।

एसआईटी के अन्य सदस्य हैं पंचकूला के पुलिस अधीक्षक मनीष चौधरी, पंचकूला के पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र सिंह, सेक्टर 14 थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अमन कुमार और राज्य अपराध शाखा, पंचकूला के निरीक्षक तरसेम लाल। कपूर से यह पूछने पर कि क्या राठौर और अन्य अभियुक्तों, संदिग्धों एवं शिकायतकर्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा तो उन्होंने कहा कि जांच के लिए जो भी कार्रवाई की जा सकती है, वह की जाएगी।

कपूर ने कहा कि एसआईटी टीम पिछले 19 वर्षों के दौरान जुटाए गए सभी दस्तावेजों की जांच करेगी जिसके आधार पर सीबीआई की अदालत ने पिछले हफ्ते राठौर को छह महीने जेल की सजा सुनाई। डीजीपी आरएस दलाल ने कहा कि मामले के कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है और हम मामले की तत्परता से जांच करेंगे।

हरियाणा के 1965 बैच के आईपीएस अधिकारी को रुचिका से छेड़छाड़ के मामले में सीबीआई की अदालत ने पिछले हफ्ते छह महीने की मामूली सजा सुनाई थी। 1990 में उभरती टेनिस खिलाड़ी से छेड़छाड़ के वक्त वह पुलिस महानिरीक्षक थे। तीन वर्ष बाद 28 दिसंबर 1993 को रुचिका ने जहर खा लिया और अगले दिन उसकी मौत हो गई। राठौर 2002 में सेवानिवृत्त हो गया।

रुचिका के पिता सुभाष चंद्र गिरहोत्रा और भाई आशू की शिकायत पर राठौर और अन्य के खिलाफ दो नई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं। यह प्राथमिकियां पोस्टमार्टम कार्यवाही और उसके भाई को गलत मामलों में फंसाने को लेकर दर्ज की गई। गिरहोत्रा ने अपनी शिकायत में कहा कि सेक्टर छह की पुलिस द्वारा पीजीआई चंडीगढ़ में रुचिका की मौत के बाद की गई तहकीकात उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर की थी क्योंकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है। रुचिका ने 28 दिसंबर 1993 को आत्महत्या का प्रयास किया और अगले दिन उसकी मौत हो गई।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के पंचकूला से पुलिस पार्टी चंडीगढ़ के पीजीआई गई और मौत बाद की तहकीकात की और पोस्टमार्टम कराया। आशु की शिकायत में कहा गया है कि उसकी बहन से छेड़छाड़ के बाद वाहन चुराने समेत विभिन्न अपराधों में उसके खिलाफ सात मामले दर्ज किए गए। उसने हत्या का प्रयास और उत्पीड़न सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उसे पीड़ित करने के जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। आरोपियों में राठौर, सहायक उपनिरीक्षक जय नारायण, उपनिरीक्षक प्रेम दत्त, एएसआई सेवा सिंह और अन्य शामिल हैं।

परिवार के वकील पंकज भारद्वाज ने संवाददाताओं से कहा कि 1990 में रुचिका के साथ छेड़छाड़ के बाद आशु के खिलाफ गलत मामले दर्ज करने और अवैध रूप से बंदी बनाकर रखने के मामले में उन्होंने राठौर और अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया, सभी चीजें राठौर के इशारे पर की गईं।

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