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कोटला को बचाने की जिम्मेदारी बिंद्रा पर

कोटला को बचाने की जिम्मेदारी बिंद्रा पर

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोटला कांड के बाद राजधानी के इस मैदान को प्रतिबंध से बचाने के लिए अपने पूर्व अध्यक्ष और अनुभवी प्रशासक आई एस बिंद्रा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

भारत और श्रीलंका के बीच रविवार को फिरोजशाह कोटला पर पांचवां वनडे को खतरनाक पिच होने के कारण रद्द कर दिया गया था। मैच रेफरी आस्ट्रेलिया के एलन हर्स्ट ने कोटला कांड के बाद पिच के बारे में कड़ी रिपोर्ट आईसीसी को भेजी है। आईसीसी ने इस मुद्दे पर बीसीसीआई को जवाब देने के लिए 14 दिन का समय दिया है।

कोटला कांड के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कोटला पर एक से दो वर्ष का प्रतिबंध लग सकता है और उससे विश्वकप 2011 के मैचों की मेजबानी भी छिन सकती है। बीसीसीआई ने अपने सबसे अनुभवी प्रशासक बिंद्रा को बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी है ताकि वह कोटला को कम से कम सजा दिलाने का प्रयास कर सकें। बिंद्रा प्रशासनिक मामलों का खासा अनुभव रखते हैं और वह आईसीसी के प्रधान सलाहकार भी हैं।

बिंद्रा का आईसीसी में अच्छा रुतबा माना जाता है और बीसीसीआई को उम्मीद है कि वह आईसीसी में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकेंगे। बीसीसीआई के सामने इस समय समस्या यह है कि यदि कोटला पर बड़ा प्रतिबंध लग जाता है तो फिर उसे कोटला में होने वाले विश्वकप के चार लीग मैचों का अन्यत्र स्थानान्तरण करना पड़ेगा और विश्वकप के तय हो चुके कार्यक्रम में उसे नए सिरे से मशक्कत करनी पड़ेगी।

भारत और श्रीलंका के बीच पांचवां वनडे 23.3 ओवर के बाद पिच के खतरनाक होने के कारण रद्द कर दिया गया था। हर्स्ट ने अपनी रिपोर्ट में इस पिच के लिए काफी खराब रिपोर्ट दी है। हालांकि बीसीसीआई ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपनी मैदान एवं पिच समिति को बर्खास्त कर दिया था जबकि दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की मैदान एवं पिच समिति ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था।

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