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हिम तेंदुआ: रात का शिकारी

हिम तेंदुआ: रात का शिकारी

हिम तेंदुआ एक सुंदर जानवर है, लेकिन इसकी गुर्राहट डराने के लिए काफी है। यह अत्यंत दुर्लभ जीव है। यह देश के कुछ खास चिड़ियाघरों में ही दिखाई देता है। यह हिमालय की ऊंची पर्वत श्रंखलाओं में वृक्षविहीन जगह पर देखने को मिलता है। यह समुद्रतल से 3,600 मीटर से लेकर लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह दुर्गम शिखरों पर घूमता रहता है। सामान्यत: यह कश्मीर से भूटान के मध्य के क्षेत्र में नजर आता है। प्राणि विज्ञान के अनुसार इस वन्यजीव का नाम पांतेरा उंचिआ है। अंग्रेजी में इसे स्नो लेपर्ड कहते हैं। सामान्य तेंदुए की तुलना में यह कुछ छोटा होता है। इसका माथा ऊंचा होता है तथा छोटी-सी थूथनी होती है।

इसकी पूंछ की लंबाई करीब 90 सेंटीमीटर तक होती है, जबकि इसकी लंबाई एक मीटर के आसपास होती है। एक वयस्क हिम तेंदुए का वजन 35 से 40 किग्रा के मध्य होता है। इसका रंग एकदम धवल न होकर कुछ मैला सफेद जैसा होता है और पूरे शरीर पर मुलायम रोंए होते हैं। जानते हो इसकी खाल बहुत मखमली होती है। सफेद रंग की खाल पर काले रंग के धब्बे इस तरह लगते हैं, मानो चित्रकारी करसजाया गया हो। रंग के कारण यह बर्फ और चट्टानों के बीच नजर नहीं आता। इससे इसे घात लगा कर शिकार करने में आसानी रहती है। हिम तेंदुए का जीवनकाल 15-20 वर्ष का होता है।

हिम तेंदुए बर्फ से ढके निर्जन इलाकों में अकेले रहने के आदी होते हैं। ये प्राय: दिन में सोते हैं तथा रात में शिकार पर निकलते हैं। शिकार करने के लिए यह बिजली सी फुर्ती से छलांग लगाते हैं। चट्टानों पर छलांग लगाने में लंबी पूंछ इनकी सहायता करती है। जंगली बकरी, खरगोश, कस्तूरी मृग आदि इनका शिकार होते हैं। गड़रिये जब भेड़-बकरी चराने जाते हैं तो यह मौका देख भेड़-बकरियों का शिकार भी कर लेते हैं। इनकी खुराक शेर और बाघ की तुलना में कम होती है, लेकिन देखने में यह उतने ही रोबीले लगते हैं। सर्दियों में करीब 1500 से 1800 मीटर तक निचले स्थानों पर आ जाते हैं। अत्यधिक ऊंचाई पर प्राकृतिक आवास के कारण यह काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। आज इन्हें इंसानों से अधिक खतरा है। यही कारण है कि इन्हें संकटग्रस्त जीवों की सूची में शामिल किया गया है। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र है। पर्यटन से भी इनके अवासीय क्षेत्र पर प्रभाव पड़ा है। पर्यटक इसे कभी कभार लद्दाख के आसपास देख पाते हैं। हिम तेंदुआ संसार के कम ही चिड़ियाघरों में मिलता है। देश में तुम इसे दार्जिलिंग के चिड़ियाघर में आसानी से देख सकते हो।

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