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शिक्षा में सुधार का वर्ष

सीबीएसई की दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा समाप्त करने से लेकर शिक्षा को प्रत्येक बच्चों के लिए मूलभूत अधिकार बनाने वाला विधेयक पारित होने तक, शिक्षा के मोर्चे पर वर्ष 2009 में कई सुधार हुए और तकनीकी खराबी की वजह से कैट की परीक्षा का नया प्रारूप तैयार किया गया।

संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाए गए कपिल सिब्बल ने सुधारों की नयी रूप रेखा तैयार करते हुए शिक्षा रूपी उत्प्रेरक के जरिये विकास का काम शुरू किया। सिब्बल को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के फाइनेस्ट माइंड्स में से एक की संज्ञा दे चुके हैं।

शिक्षा तक सबकी पहुंच बनाने, उसे स्तरीय बनाने तथा उस पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए सिब्बल ने कई नीतियां बनाईं और विधायी कदम उठाए। सुधार प्रक्रिया की शुरूआत वर्ष 2010-11 के अकादमिक सत्र से दसवीं कक्षा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा समाप्त करने तथा चालू वर्ष से ग्रेडिंग प्रणाली शुरू करने की सरकार की घोषणा से हुई। यह कदम छात्रों पर परीक्षा का तनाव घटाने के लिए उठाया गया।

सीबीएसई ने निरंतर और समग्र मूल्यांकन की भी शुरूआत की है जिसके तहत निरंतर आधार पर छात्रों की योग्यता का आकलन किया जाएगा। बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार विधेयक का पारित होना भी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम रहा। यह विधेयक पिछले चार साल से लंबित था। इस ऐतिहासिक कानून में छह से 14 साल की उम्र के बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा को उनका मूलभूत अधिकार बनाने का प्रावधान है।

इस अधिनियम में कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए स्कूलों में 25 फीसदी सीटें अलग रखने, प्रवेश से पहले कैपिटेशन फीस लेने की प्रवत्ति पर रोक लगाने और बच्चों या अभिभावकों की साक्षात्कार प्रक्रिया खत्म करने का भी प्रावधान है।

इस साल कॉमन एडमिशन (कैट) कंप्यूटर के माध्यम से लिया गया, लेकिन इस पर तकनीकी खराबी की मार पड़ गई। 8,000 से अधिक छात्रों की परीक्षा इस तकनीकी खराबी से बाधित हो गई और यह मुद्दा संसद तक में उठाया गया। बहरहाल, कैट समिति ने परीक्षा की समीक्षा करने के बाद घोषणा की कि जो प्रतिभागी परीक्षा नहीं दे सके, उनकी 11 दिन की अवधि के दौरान नयी परीक्षा ली जाएगी।

अक्सर भ्रष्टाचार और अन्य गलत कारणों से सुर्खियों में रहने वाली उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मानव संसाधन मंत्रालय कई विधेयक लेकर आया। उच्च शिक्षा में सुधार को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीएचईआर) बनाने का फैसला भी किया। प्रस्तावित एनसीएचईआर यूजीसी, एआईसीटीई, डीसीई और एनसीटीई का स्थान लेगा। मंत्रालय ने देश में विदेशी शिक्षा प्रदाताओं के प्रवेश के लिए भी एक विधेयक तैयार किया है।

उच्च शिक्षा में गलत प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक अन्य विधेयक तैयार किया है। सरकार शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने के लिए एक राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय बनाना चाहती है। इसके अलावा मंत्रालय ने शैक्षिक न्यायाधिकरणों की स्थापना के लिए एक अलग विधेयक भी तैयार किया है। बहरहाल, डीम्ड विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा काम सरकार साल समाप्त होते तक नहीं कर सकी। देश में इस समय 130 डीम्ड विश्वविद्यालय हैं जिनमें से 100 विश्वविद्यालय निजी क्षेत्र में हैं। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई संस्थानों को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया जो इस दर्जे के पात्र नहीं थे।

सरकार ने भ्रष्टाचार के एक मामले में एआईसीटीई के अध्यक्ष आर ए यादव को निलंबित कर दिया। यह मामला सीबीआई ने दर्ज किया था। एजेंसी ने 16 जुलाई को एआईसीटीई के सदस्य सचिव के नारायण राव को गिरफ्तार किया और यादव, क्षेत्रीय अधिकारी श्रीओम दयाल, उप निदेशक रविन्दर रंधावा और सलाहकार एच सी राय के खिलाफ मामला दर्ज किया। जल्दबाजी में 15 कुलपतियों के चयन को लेकर आलोचना की शिकार हो रही कांग्रेस ने आईआईएम संस्थानों के कुलपतियों और निदेशकों की नियुक्ति स्वतंत्र चयन मंडल के जरिये करने का विचार पेश किया।

तकनीकी शिक्षा में प्रसार के लिए सरकार ने छह नए आईआईएम की स्थापना की मंजूरी दे दी। उसने आईआईटी और आईआईएम को देश में स्तरीय प्रौद्योगिकी शिक्षा के प्रसार के लिए भावी योजना बनाने के लिए भी कहा। वर्ष 2009 में वेतन ढांचे में विसंगति को लेकर आईआईटी फैकल्टी और सरकार के बीच टकराव भी हुआ। बाद में सरकार ने फैकल्टी को आश्वासन दिया कि वेतन ढांचे पर उसके दिशानिर्देश वे मानदंड हैं जिनमें उत्कष्टता को बढ़ावा देने के लिए ढील दी जा सकती है।

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