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सिक्किम: चमलिंग की रिकॉर्ड जीत और रेल संपर्क रहा खास

पवन कुमार चमलिंग का रिकॉर्ड चौथी बार सिक्किम की बागडोर संभालना, पहली रेल लाइन की आधारशिला और एक अनोखी पर्यावरण उपलब्धि हासिल करना इस वर्ष राज्य की प्रमुख घटनाएं रहीं।

चमलिंग के नेतृत्व में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने चुनाव में शानदार सफलता हासिल करते हुए विधानसभा की सभी 32 सीटों पर कब्जा जमाया, जिससे चमलिंग का चौथी बार राज्य की बागडोर संभालने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस उपलब्धि के साथ ही चमलिंग पश्चिम बंगाल के ज्योति बसु और अरूणाचल प्रदेश के गेगांग अपांग की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपने प्रदेशों में चार बार सत्ता की बागडोर संभाली।

राज्य का दर्जा हासिल करने के 34 बरस के बाद सिक्किम को आखिरकार देश के रेल नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला, जब 1400 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाली रांगपो-सेवोक रेलवे लाइन की आधारशिला रखी गई। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 30 अक्टूबर को राज्य की इस पुरानी साध को पूरा किया। 52.7 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के बन जाने से सिक्किम के आर्थिक विकास में तेजी आएगी। इस रेलवे लाइन के 2015 तक तैयार होने की उम्मीद है।

चमलिंग ने इस वर्ष राज्य के लिए एक अनूठा पर्यावरण कार्यक्रम शुरू किया। जुलाई में शुरू किए गए दस मिनट में हरियाली की ओर कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में छह लाख से अधिक पौधे रोपे गए ताकि राज्य की धरती को हरा भरा किया जा सके।

पर्यवेक्षको ने माना कि चमलिंग की यह जीत राज्य की राजनीतिक स्थिरता, ठोस विकास और पर्यटन के नक्शे पर राज्य के तेजी से उभरने के कारण संभव हो सकी। चमलिंग ने इस जीत के जरिए सत्ता विरोधी लहर के भ्रम को तोड़ा, विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्सीमांकन के बावजूद अपने उम्मीदवारों की लोकप्रियता को साबित किया और नर बहादुर भंडारी के नेतृत्व वाले कांग्रेसी खेमे की चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया। याद रहे कि यहां राहुल गांधी ने कांग्रेस के हक में प्रचार किया था।
    
सत्ता संभालने के बाद चमलिंग सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर विशेष जोर दिया।
    
वैश्विक उष्मीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण सिक्किम के पहाड़ों से बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों के घटने की खबरों से चिंतित चमलिंग सरकार ने समय गंवाए बिना अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। पर्यावरण के मुद्दे ने बाद में भी चमलिंग सरकार को परेशान किया, जब केन्द्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने चुंगथांग घाटी में तीस्ता नदी पर बनने वाली छह पनबिजली परियोजनाओं को यह कहकर रोक दिया कि इससे कई दुर्लभ वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास उजड़ जाएंगे।

इस फैसले से आहत चमलिंग सरकार ने मंत्रालय से इस फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया, लेकिन अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं हो पाया है।
    
अन्य मामलों में पृथक गोरखालैंड की मांग के लिए दार्जिलिंग हिल्स ओर उसके आसपास के इलाकों में चल रहे आंदोलन ने सिक्किम के पर्यटन उद्योग पर बुरा असर डाला। आंदोलनरत गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के आह्वान पर बार-बार होने वाले बंद और हड़तालों ने राज्य के आर्थिक विकास को प्रभावित किया।

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