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2009 में नगालैंड में छाया रहा सुलह समझौते का अभियान

बरसों पुरानी नगा समस्या का समाधान खोजने की उम्मीद में नगालैंड में शांति, एकता और सुलह समझौते के लिए चलाए जा रहे अभियान के फलस्वरूप वर्ष 2009 में कुछ सकारात्मक संकेत नजर आए। यहां देश की पहली आईआर (महिला) बटालियन की स्थापना भी हुई जिसमें नगा लड़कियां हैं।

राज्य में कानून व्यवस्था से लेकर राजनीतिक हिंसा तक सब कुछ शांत रहा। लेकिन छोटी-मोटी अपराध की घटनाओं, खास कर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा तथा जबरन धन वसूली की घटनाओं में वृद्धि हुई।
राज्य को केंद्र से होने वाले सब्सिडी युक्त कोयले के आवंटन में कथित अनियमितता की गूंज विधानसभा में भी हुई और विपक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की।

संघर्षरत नगा भूमिगत समूहों के बीच तालमेल बनाने और सुलह समते के लिए करीब डेढ़ साल से किए जा रहे प्रयासों का असर इस साल सितंबर में नजर आया। तीन नगा भूमिगत समूहों ने एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। गिरजाघरों और गैर सरकारी संगठनों के नेताओं के समूह फोरम फॉर नगा रिकौंसिलिएशन (एफएनआर) ने देश के अंदर और बाहर संघर्षरत विभिन्न समूहों के साथ विचार-विमर्श शुरू किया।

इस विचारविमर्श के फलस्वरूप एक समझौता पर हस्ताक्षर किए गए और दो भूमिगत नगा समूहों में एनएससीएन में आईएम तथा एनएनसी में एफजीएन के नेताओं ने 23 सितंबर को थाईलैंड के चियांग मई शहर में एक संयुक्त कार्यकारी समूह गठित किया। बहरहाल, भूमिगत समूहों के शीर्ष नेताओं ने यह भी साफ कर दिया कि वे नई दिल्ली की ओर से कोई सशर्त शांति पैकेज स्वीकार नहीं करेंगे।

नगा शांति वार्ता के लिए एक सहयोगी की भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता जताते हुए विभिन्न दलों के नेताओं ने आम सहमति से 27 नवंबर को विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र और भूमिगत समूहों से वार्ता प्रक्रिया तेज करने का आहवान किया गया था। प्रस्ताव में नगा समस्या को हल करने के लिए संप्रग सरकार, खास कर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी चिदंबरम की गंभीरता और प्रतिबद्धता की सराहना की गई थी। गृह मंत्रालय ने 100 दिनों के एजेंडा में नगा शांति प्रक्रिया को प्राथमिकता दी और वार्ताकारों के बजाय खुद ही इसे सीधे निपटाने का फैसला किया।

केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई अक्टूबर में कोहिमा आए और राज्य सरकार तथा नगा समाज के समूहों के सदस्यों से बातचीत की। पिल्लई के अनुसार, केंद्र एनएससीएन-आईएम द्वारा पूर्व में दिए गए प्रस्तावों के आधार पर एक राजनीतिक प्रस्ताव तैयार कर रहा है और मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद इसे नगा समूहों को भेजा जाएगा। राजनीतिक मोर्चे पर, सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के प्रत्याशी ने देश में सर्वाधिक मतों के अंतर से लोकसभा चुनाव जीत कर राज्य में अपनी स्थिति मजबूत की। एनपीएफ के चारों प्रत्याशियों ने विधानसभा उपचुनाव में विपक्षी कांग्रेस से सीटें छीन लीं। लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा की नगालैंड इकाई का एनपीएफ में विलय हो गया, जिससे एनपीएफ की ताकत और बढ़ गई।

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