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मध्य प्रदेश: सलेम और यूनियन कारबाइड मामले अंतिम दौर में

अपराध जगत के सरगना अबू सलेम का फर्जी पासपोर्ट मामला बीते वर्ष में जहां अदालती कार्रवाई में अपने अंतिम पड़ाव पर है, वहीं यूनियन कारबाइड के स्थानीय कीटनाशक दवा बनाने वाले कारखाने से रिसी जहरीली गैस मिथाइल आइसो सायनेट का आपराधिक मामला भी पच्चीस साल बाद अब फैसले के करीब है। कानून और न्याय के जानकार कहते हैं कि सलेम के फर्जी पासपोर्ट मामला की सुनवाई अब अंतिम दौर में है तथा अगले साल किसी भी वक्त इसका फैसला आ सकता है। यह मामला भोपाल के मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी मोहन पी तिवारी की अदालत में चल रहा है।

मामला की अब तक हुई सुनवाई और गवाही पर नजर डालने पर लगता है कि सलेम के खिलाफ यह आरोप सिद्ध होना लगभग असंभव है। अपनी कथित प्रेमिका एवं बॉलीवुड अभिनेत्री मोनिका बेदी की ही तरह सलेम भी इस मामले में बरी हो सकता है। मोनिका के लिए आए फैसले के खिलाफ अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय की शरण में गया है, जहां अभी इस पर सुनवाई चल रही है।

भोपाल में हजारों लोगों को मौत की नींद सुला देने वाली जहरीली मिथाइल आइसो सायनेट गैस के स्रोत यूनियन कारबाइड संयंत्र के खिलाफ आपराधिक मामला भी अब पच्चीस साल बाद मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में अंतिम मोड़ पर है और इसमें भी अगले साल किसी भी वक्त फैसला आ सकता है। अभियोजन पक्ष सीबीआई के गवाहों की सूची लगभग समाप्त हो गई है और बचाव पक्ष भी इनसे सवाल-जवाब कर चुका है।

प्रदेश में अदालती कामकाज की दृष्टि से बीते साल 2009 सामान्य ही रहा है। कोई भी बड़े अथवा चर्चित मामले का इस साल निपटारा नहीं हुआ, लेकिन कुछ आपराधिक मामलों की सुनवाई ने तेजी पकड़ी है। नक्सलियों के लिए हथियार बनाने वाले भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के सतनामी नगरी के कारखाने का मामला हो अथवा अपराध जगत के सरगना अबू सलेम का मामला हो या गैस त्रासदी मामला हो सभी की सुनवाई तेजी से हो रही है।

बीत रहे साल में ही पहली बार फर्जी पासपोर्ट मामले में सलेम को प्रत्यर्पण के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच भोपाल लाया गया। इस मामले में अब तक पच्चीस गवाहों ने अदालत में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराये है।
कारबाइड मामले की तरह ही नक्सलियों के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में तेजी आयी है। इस समय पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कम्प्यूटर विशेषज्ञ के बयान चल रहे हैं जो नक्सलियों से जब्त की गई सीडी को स्क्रीन पर दिखाकर न्यायाधीश के सामने अपने बयान दर्ज करा रहे हैं।

नवंबर 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की प्रत्याशी उमा भारती द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार के लगाए गए आरोपों पर सिंह द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले की सुनवाई में भी इस साल तेजी आई है। सिंह खुद सी जे एम तिवारी की अदालत में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। कांग्रेस महासचिव सिंह को इस वर्ष दो अलग-अलग मामलों में दो बार अदालत आना पड़ा है।

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