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राठौड़ ने अग्रिम जमानत मांगी, अदालत का इनकार

राठौड़ ने अग्रिम जमानत मांगी, अदालत का इनकार

रुचिका प्रकरण में दो नई प्राथमिकियों के बाद आसन्न गिरफ्तारी का सामना कर रहे हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौड़ ने अग्रिम जमानत के लिए बुधवार को सत्र अदालत में आवेदन किया, लेकिन उन्हें तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया गया।

राठौड़ को रुचिका के साथ छेड़छाड़ के मामले में छह महीने जेल की सजा दी गई है। राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख की वकील पत्नी आभा ने जिला और सत्र न्यायाधीश एसपी सिंह के समक्ष आवेदन देते हुए कहा कि छेड़छाड़ मामले में रुचिका के परिवार के सदस्यों ने तथ्य को तोड़ मरोड़कर, मनगढंत और फर्जी ढंग से प्रस्तुत किया है ।

चालीस पन्ने के आवेदन में आभा ने आरोप लगाया कि उनके पति पर मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है और इस मामले में अदालत से उन्होंने संरक्षण मांगा। न्यायाधीश ने जब आभा से पूछा कि क्या उनके पास नई प्राथमिकियों की प्रतियां हैं तो अधिवक्ता ने जवाब दिया कि हमें मीडिया के माध्यम से एफआईआर और नए आरोपों के बारे में पता लगा है। मीडिया ट्रायल और तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने के मद्देनजर हम इस अदालत से संरक्षण चाहते हैं।

जिरह सुनने के बाद न्यायाधीश ने पहले कार्यवाही स्थगित की और कहा कि उन्हें विस्तार से मामले की जानकारी प्राप्त करनी होगी। बाद में उन्होंने एक जनवरी तक जवाब देने के लिए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने राठौड़ को तुरंत कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

न्यायाधीश ने राठौड़ के आवेदन पर सुनवाई करते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक को एक जनवरी तक सारे दस्तावेज पेश करने को कहा ताकि उन कागजात का अध्ययन करने के बाद मामले में कोई फैसला किया जा सके। अदालत ने कहा कि एफआईआर की प्रकृति के बारे ठीकठीक जानकारी नहीं होने की स्थिति में अदालत के लिए कोई आदेश पारित करना कठिन होगा।

इस फैसले के बाद राठौड़ और उनकी पत्नी ने तुरंत अदालत परिसर छोड़ दिया तथा मीडिया के प्रश्नों का जवाब दिये बिना एक निजी इंडिका वाहन में रवाना हो गए। वर्ष 1990 के छेड़छाड़ मामले की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी आराधना की मां मधु प्रकाश की आरे से लगाए गए आरोपों पर राठौड़ की पत्नी आभा ने कहा कि मधु प्रकाश तथ्यों को तोड़ मरोड़ रही है।

जिरह की शुरुआत करते हुए आभा ने कहा कि यह 18-19 वर्ष पुराना मामला है और आशु (रुचिका का भाई) के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास का मामला) का मामला इन वर्षों में कभी किसी अदालत के समक्ष नहीं उठाया गया। आभा ने कहा, इससे पहले के सभी एफआईआर में आशु ने हत्या के प्रयास के आरोप कभी नहीं लगाए। हमें मीडिया के माध्यम से आरोप के बारे में जानकारी हुई।

उन्होंने कहा कि रुचिका की उम्र उस समय 18 साल 10 महीने बताई गयी थी तथा उसकी मत्यु के समय आईपीसी की धारा 305 (नाबालिग को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का) नहीं लगाई गई। आभा ने कहा कि दूसरा पक्ष अपनी बातों को यहां तक कि सबसे शीर्ष उच्चतम न्यायालय के स्तर पर भी रख चुका है और इसमें कोई नया कानूनी पेंच नहीं है।

उन्होंने अदालत से कहा कि यह सब मीडिया के दबाव और मामले को मीडिया द्वारा बढ़ा चढ़ाकर पेश करने से हो रहा है। मीडिया ट्रायल हो रहा है। यह मुकदमा मीडिया की अदालत में लड़ा जा रहा है। आभा ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में समाप्त हो चुका है और मीडिया अदालती फैसले का सम्मान नहीं कर रहा है।

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