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वोटरों की ट्रेडिंग, जैसी लिस्ट वैसी व्यवस्था

 तुम्हारे पास कितने वोट हैं, उसकी लिस्ट लाओ, फिर देखते हैं, कहीं ऐसा तो नहीं ऐनवक्त पर धोखा दे दें। कैसी बातें करते हो। मेरे पास सॉलिड वोट है। तुम भी क्या याद करोगे? इस तरह का संवाद प्रत्याशियों के खेमे में वोटों के सौदागर और प्रत्याशियों के सिपहसलारों के मध्य आजकल चल रहा है।


एमएलसी के चुनाव के मतदान के लिए नौ दिन शेष बचे हैं। वोटर जुटाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस दौरान ऐसे भी लोग सक्रिय हो गए हैं जो प्रत्याशियों के दरबार में पहुँच रहे हैं। वे अपने हाथ में वोट की बात कर रहे हैं। जिन वोटरों के प्रत्याशी से सीधे संबंध नहीं हैं तथा सक्रिय नहीं हैं, वे घर बैठे इन्हीं सौदागरों से काम चला रहे हैं। इन सौदागरों के भी कम मजे नहीं हैं। प्रत्याशियों के दरबार में पहुँचते ही उनकी मेहमान की तरह खातिरदारी की जा रही है। प्रत्याशियों के आगे भी मजबूरी है कि 3357 वोटरों के लिए उनके दरवाजे तक नहीं जा सकते। वे भी इन्हीं सौदागरों के माध्यम से वोट पक्का कर रहे हैं। सौदगारों से पहले उनके बताए वोटरों की लिस्ट माँगी जाती है। उनसे लिस्ट के साथ वोटरों के मोबाइल नंबर भी लिखवाए जा रहे हैं ताकि उनसे भी संपर्क रहे। सौदागर यह भी बताते हैं कि कुछ वोटर तो उनके घर पर हैं तो कुछ अभी अपने घरों पर हैं। प्रत्याशियों के सिपहसलार उनसे कहते हैं कि अमुक स्थान पर वोटरों को ले जाओ, वहाँ पर सारी व्यवस्था है। मतदान शुरू होने तक हर ख्वाहिश पूरी की जा रही है।

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