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क्या जिंदा है ये हिस्ट्रीशीटर

 मांट के गांव केशोपुरा निवासी हिस्ट्रीशीटर रामवीर की हत्या पहेली बन गयी है। ग्रामीण का आरोप है कि दस वर्ष पूर्व राया क्षेत्र में मारा गया व्यक्ति हिस्ट्रीशीटर रामवीर नहीं था अपितु कोई और था। इसक संबंध में शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की है।


केशोपुर के रामगोपाल भारद्वाज ने कहा है कि मांट के गांव का रामवीर सिंह हिस्ट्रीशीटर था। उस पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। सन 1995 में रामवीर का नाम फिरोजाबाद में हुई रोडवेज बस लूटकांड में  आया था। उसे एटा पुलिस ने पकड़ लिया और जेल भेज दिया। बाद में परिवारीजनों ने षडयंत्र के तहत रामवीर को सन 1999 में राया क्षेत्र में हुए गोलीकाूड में मृतक घोषित कर दिया। श्री भारद्वाज द्वारा की शिकायत में कहा है कि कथित रामवीर हत्या के मामले में दो लोगों ने झूठी गवाही देकर मृतक की रामवीर के नाम से पहचान कराकर पंचायतनामा भर दिया था। श्री भारद्वाज का आरोप है कि अब रामवीर गांव में श्यामवीर के नाम से रह रहा है। उसे गत माह मांट पुलिस ने तमंचा सहित गिरफ्तार किया था। जेल से छूटने के बाद अब वह गायब है।


इस मामले में थानाध्यक्ष मांट वीपी गिरी का कहना है कि विरोधी पार्टी की शिकायत पर सीबी सीआईडी ने इसकी जांच की तथा जांच अधिकारी हैदरअली ने रामवीर को मृत पाया। श्री गिरी का कहना है कि रामवीर की अपने भाई श्यामवीर से हुलिया काफी मेल खाता है। कई मामलों में लोग श्यामवीर को रामवीर समझ लेते हैं। रामवीर पूर्व में एटा जेल में भी निरुद्ध रह चुका है। रामवीर का पुराना हुलिया लेने का प्रयास कर रहे हैं।
टॉवर से गिरकर

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