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भाजपा अध्यक्ष के लिए तो संघ की ही चलेगी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलबाजियां चाहे जितनी लगाई जाएं लेकिन एक बात साफ लग रही है कि इस मामले में पसंद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ही चलेगी। अगर ऐसा हुआ तो जातीय समीकरणों के नाम पर अपनी गोटी लाल करने में जुटे लोगों को धक्का लग सकता है। इस दौड़ में शामिल लोगों को तो संघ अपनी कसौटी पर कसेगा ही यह भी संभव है कि नितिन गडकरी की तरह अचानक किसी अप्रत्याशित नाम की घोषणा हो जाए।


संगठनात्मक क्षमता और दलीय निष्ठा के अलावा उम्मीदवारों के बैकग्राउंड को भी संघ पैमाना बना सकता है। सबको साथ लेकर चलने की अनिवार्यता तो है ही। भाजपा ने चुनाव के लिए अभियान तेज कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह ने खरमास बाद चुनाव करा लेने की घोषणा की थी। लेकिन फरवरी तक नये अध्यक्ष की ताजपोशी की उम्मीद है।


संघ प्रमुख मोहन भागवत के पटना से वापस लौटते ही भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय लोग भी केन्द्रीय कमेटी में अपनी जगह बनाने के लिए चिंतित हैं। संघ प्रमुख के नागरिक अभिनंदन के लिए आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में लगाये गये भाजपा नेताओं को संघ की पसंद मानें तो प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जनार्दन सिंह सीग्रीवाल और प्रदेश मंत्री रणवीर नंदन का नाम सामने आता है। अश्विनी चौबे तो संघ की पहली पसंद हो ही सकते हैं लेकिन परेशानी यह है कि सरकार में वे भाजपा कोटे के इकलौते ब्राहम्‍ण मंत्री हैं। स्वच्छ छवि वाली पहचान बनाने में सफल चन्द्रमोहन राय को लेकर भी भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में चिन्ता है। मंत्री पद के लिए भाजपा कोटे से उनकी घोषणा पहले ही हो चुकी है। लेकिन विलंब के कारण अध्यक्ष पद की दावेदारी भी उनकी मजबूत होती जा रही है। केन्द्रीय कमेटी में बिहार का कोटा तीन बनता है। ऐसे में रविशंकर प्रसाद और राजीव प्रताप रूडी की दावेदारी प्रवक्ता पद के लिए मजबूत लगती है। डा. सी.पी. ठाकुर, शाहनवाज हुसैन और हरेंद्र प्रताप भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। महिला कोटे से किरण घई सिन्हा तो वर्तमान में सचिव हैं लेकिन नई कमेटी के लिए सुखदा पांडेय के नाम की चर्चा भी तेज है।

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