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गुरुजी के गुड़ में फंसी भाजपा

गुरुजी का गुड़ इतना मीठा था कि आखिरकार बीजेपी फंस ही गई। आखिर बीजेपी ने उसे ही गले लगाया जिसके पीछे वह कभी हाथ धोकर पड़ी थी। यही पॉलिटिकल दांवपेच झारखंड की जनता के लिए यह मुसीबत साबित हो सकता है। अगर यह गठबंधन आगे नहीं चल पाया तो कहीं मध्यावधि चुनाव का दंश न झेलना पड़े। वैसे 18-18 सीटों पर विजय हासिल करने वाले दोनों बड़ी पार्टिया हैं पर निर्भर करेगा कि वे झारखंड की जनता को कैसी सरकार देते हैं।
मनीष कुमार सिंह, साउथ गणेश नगर, नई दिल्ली

आखिर यह है क्या?
आज झारखंड में सरकार बनाने के लिए जो भी कवायद चल रही है, वह सबके सामने है। कल तो जो बीजेपी सिबू सोरेन का विरोध कर रही थी आज वही उसी के साथ मिलकर सरकार बना रही है.. क्या सिबू सोरेन का चरित्र इतनी जल्दी परिवर्तित हो गया? आखिर यह है क्या.. इतना तो स्पष्ट है कि यह सब तो झारखंड की जनता के लिए नहीं हो रहा है..आज हिन्दुस्तान में जितनी भी पार्टियां हैं सबका बस एक ही उद्देश्य है ‘कैसे भी सत्ता पाओ’।
शिशु चन्दम

गाड़ियां और लड़ाइयां
इतनी गाड़ियां लगी रहती हैं की उनके नीचे कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और उनके ऊपर लड़ाइयाँ होती रहती हैं कि वह दूसरों के घरों के बाहर क्यों खड़ी हैं। खटारा कारों का कब्रिस्तान भी इधर ही बना हुआ है। लोगों ने बेकार गाड़ियां सड़क पर खड़ी की हुई हैं जिनके पीछे जानवर गंदगी फैलाते हैं। ध्वनि प्रदूषण इतना ज्यादा फैल गया है की एक मिनट बाहर बैठ भी नहीं सकते। कृपया कोई तो मदद करें
उर्मिला गोएल, ए-इ-188, शालीमार बाग, नई दिल्ली

गांवों की सुध
एम्स से डिग्री प्राप्त डाक्टरों द्वारा छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में स्वास्थ्य सेवाए देना काबिलेतारीफ है। देश के उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थाओं द्वारा डिग्री पाने वाले युवा अगर इस प्रकार गांवो में अपनी सेवाए पहुचाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे गाँव भी विकास की मुख्य धारा में शामिल होंगे।  
प्रज्ञा पांडेय

पृथक राज्य अभी जरूरी नहीं
पृथक राज्य का मुद्दा किसी के लिए आवश्यक हो सकता है मगर इतना नहीं की इसके आगे महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, आतंकवाद और अशिक्षा जैसे न जाने कितने सामयिक और ज्वलंत मुद्दों को नजरंदाज किया जाये। पहले जरूरी है उन समस्याओं से निजात पाने की जो देश के सामने मुहं बाये खड़ी हैं। अगर किसी के पास खाने को भोजन और रहने को घर नहीं है तो क्या नया राज्य उसकी इन आवश्यकताओं को पूरा कर पायेगा?
सोमेश्वर गुल्हारे

कैंसर बन गया है भ्रष्टाचार
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस व्यवस्था में रहना और कार्य करना हम सब का सौभाग्य है, मगर भ्रष्टाचार का कीड़ा लोकतंत्र की कमजोर दीवारों में छेद करके हमारी व्यवस्था के खंभों को दीमक की तरह चट कर रहा है।  
गुलशन कुमार,सेक्टर-70, मोहाली

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