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यदि गालिब न होते तो मैं भी न होता: गुलजार

यदि गालिब न होते तो मैं भी न होता: गुलजार

प्रख्यात शायर मिर्जा गालिब पर 1988 में टेलीविजन धारावाहिक बना चुके जाने-माने गीतकार गुलजार पर अब भी गालिब की गहरी छाप है। वह कहते हैं कि यदि गालिब न होते तो वह भी न होते। गुलजार ने गालिब के 2००वें जन्मदिन पर रविवार को दिल्ली में एक वार्षिक मशाल जुलूस में हिस्सा लिया था।

गुलजार ने कहा कि यह एक वार्षिक परंपरा है जिसे गालिब पर गहन शोध कर चुके पवन कुमार वर्मा ने शुरू किया था। हर साल गालिब के जन्मदिन पर हम सभी दिल्ली के टाउन हॉल से कासिम जान गली स्थित गालिब के घर तक मशाल जुलूस निकालते हैं।

उन्होंने कहा कि मिर्जा गालिब को उनकी वर्षगांठ पर याद करके हम कुछ खास नहीं कर रहे हैं। उनका घर एक कोयला गोदाम में तब्दील हो गया था बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने इस स्मारक को सहेजने के लिए कदम उठाए। अब गालिब का घर एक संग्रहालय है और वहां एक मकबरा है, जहां हम हर साल उनकी वर्षगांठ पर पहुंचते हैं। गुलजार कहते हैं कि यदि गालिब न होते तो मैं भी गीतकार न होता।

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