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न्याय पर टैक्स

सरकार यह चाहती है कि सन 2012 तक अदालतों में लटके करीब तीन करोड़ मामलों को निपटा दिया जाए। इसके लिए सरकार एक विशेष प्रयोजन संस्थान (एसपीवी) बनाएगी और एक प्रस्ताव यह है कि दो प्रतिशत का एक अधिभार लगाया जाए, जिससे इस एसपीवी का खर्च निकले। अभी यह सब प्रस्ताव के स्तर पर ही है और अगर सचमुच हमारी अदालतें मामले लटकाने के नहीं, बल्कि तुरंत फैसलों के संस्थान बनें तो लोग दो प्रतिशत अधिभार भी बर्दाश्त कर लेंगे।

सभी जानते हैं कि अदालतों में जजों की कमी है, कमरों की कमी है, साधनों की कमी है और इस कमी की वजह से न्याय-व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है। संदेह की वजह यह है कि इसके पहले अधिभारों के बारे में हमारा अनुभव बहुत अच्छा नहीं है। पिछले वर्षो में हमारे देखते-देखते दो मुख्य अधिभार लगे ही हैं। पहला अधिभार रेलवे सुरक्षा को लेकर रेल टिकटों पर लगाया गया। दावा यह किया गया था कि यह पैसा विशेष तौर पर रेलवे सुरक्षा के लिए खर्च होगा, लेकिन पैसा देने वाली जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं दिखाई गई। हमें नहीं मालूम कि यह पैसा कैसे खर्च हुआ, न ही रेलवे सुरक्षा में कोई खास सुधार दिखाई दिया।

इसके अलावा एक प्रतिशत अधिभार उच्च शिक्षा के लिए 2007 में लगाया गया। इसका भी कोई सीधा असर अब तक तो नहीं दिखाई दिया। उच्च शिक्षा निजी संस्थानों में ज्यादा महंगी होती जा रही है और सरकारी संस्थानों में जगह वैसे ही कम है। जहां तक गुणवत्ता का सवाल है उसमें भी कुछ खास फर्क नजर नहीं आता। अगर सरकार जवाबदेही दिखाए और परिणामों के प्रति प्रतिबद्ध रहे तो लोग ऐसे कामों के लिए पैसा देने से हिचकेंगे नहीं।

दरअसल लोकतंत्र के किसी एक हिस्से में सुधार को अलग से लागू करना मुश्किल होगा। प्रशासनिक सुधार और कानूनी सुधार दोनों एक साथ लागू करने होंगे। लेकिन दोनों में ही ज्यादा मुश्किल साधनों की कमी से नहीं है बल्कि तंत्र में बैठे लोगों के परिवर्तन विरोधी रवैए की वजह से है। जाहिर है कि लोकतंत्र में कोई सरकार डंडे से किसी को नहीं हांक सकती और हर परिवर्तन के लिए तंत्र के बहुसंख्य लोगों का समर्थन हासिल करना होता है। हमें सिद्धांतत: इस विचार को मानना होगा कि न्याय-व्यवस्था के केन्द्र में वह व्यक्ति है जो न्याय पाने के लिए आया है। अभी समस्या यह है कि पुलिस, प्रशासन, न्याय पालिका, वकील सबके अधिकार उससे ज्यादा हैं और उसके प्रति किसी की जवाबदेही नहीं है। जरूरी यह है कि आम नागरिक के प्रति जवाबदेही न्याय तंत्र में आए, इसके लिए सरकार को पहले अपने स्तर पर पहल करनी होगी।

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  • Web Title:न्याय पर टैक्स