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कौन करेगा इन घटनाओं का खुलासा?

अलीगंज में श्री नाथजी ज्वैलर्स में लूट के बाद हत्या, गाजीपुर में सिपाही की गोली मारकर हत्या व मड़ियाँव में व्यापारी की गोली मारकर हत्या। इन हत्याओं में किसी न किसी रूप में पुलिसकर्मी शामिल रहे हैं, जिसकी पुख्ता जानकारी पुलिस विभाग को भी है। पर उन पुलिस कर्मियों की पहुँच के चलते इन घटनाओं का खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। पुलिस विभाग में होने के कारण वह साक्ष्यों को छुपाने या नष्ट करने में सफल रहते है। पर पुलिस विभाग इन घटनाओं के खुलासे में चुप्पी साधे हुए है।

अलीगंज में 13 अगस्त 2007 में श्रीनाथ जी ज्वैलर्स में लूट के बाद दो लोगों की हत्या के मामले में कई एसएसपी,एसपी व थानेदार बदले। जो भी आया उसने इस घटना के खुलासे को अपनी प्राथमिकता बताया। पर कुछ समय बीतने के बाद सभी इस मामले में ठण्डे पड़ गए। ऐसा नहीं की पुलिस ने इस घटना के खुलासे के लिए काम नहीं किया। इस मामले में एक सीओ के रिश्तेदार के शमिल होने व वारदात में प्रयुक्त असलहे की पुख्ता जानकारी पुलिस के पास है। पर विभागीय दबाव में इसका खुलासा करने से अधिकारी हिचक रहे हैं।

गाजीपुर स्थित भूतनाथ मार्केट में 14 मार्च 2008 को सिपाही राजेन्द्र सिंह की गोलीमार के हत्या । इस मामले में हत्या के दूसरे दिन से ही पुलिस वालों के शामिल होने की भनक पुलिस विभाग को लग गई थी। इस वारदात में भी पुलिस कर्मियों के नाम काफी चर्चा में थे। खुद एसएसपी अखिल कुमार भी यह मान रहे थे कि राजेन्द्र की हत्या में सहयोगियों का ही हाथ है।  पुलिस सूत्रों के मुताबिक हत्यारे करीब-करीब पकड़ में ही थे। पर इस मामले में भी पुलिसकर्मियों व विभाग की बदनामी बचाने से रोकने के लिए विभाग शान्त बैठ गया।
 
मड़ियाँव स्थित भावना काम्पलेक्स में बने नॉनवेज कार्नर पर 19 अगस्त 2009 को  व्यापारी विवेक शुक्ला की गोली मार के हत्या । पड़ताल के  दौरना सामने आया कि हत्या में कोई पुलिस वाला शामिल है। हत्या में प्रयुक्त 9 एमएम की पिस्टल, मोटरसाकिल पर पुलिस का लोगो व प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताया हुआ डील डॉल भी इस बात की पुष्टि करते हैं। हत्यारे ने भी  दुकान पर अपने आप को एक दरोगा बताया था। अक्सर उसे लोगों ने इलाके में कई बार सादी वर्दी में पिस्टल लगाकर घुमते हुए देखा था। पर घटना के बाद से वह नहीं दिखा। इस मामले में भी पुलिसकर्मी के शामिल होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
 
ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन घटनाओं का खुलासा कौन करेगा? अभी तक इन घटनाओं में पुलिस कर्मियों के शामिल होने की पूरी जानकारी विभाग के पास है। लेकिन उन्हें बचाने के प्रयास में इन मामलों में कोई भी सटीक कदम नहीं उठाए गएँ हैं। दबी जुबान पुलिस कर्मी यह कहने से नहीं चूकते कि जबतक इन घटनाओं की पड़ताल किसी ओर जाँच एजेन्सी से नहीं कराई जाएगी,तब तक इनका खुलासा संभव ही नहीं है।

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