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ऑडी कार की कछुआ गति से चल रही है जांच

ऑडी से शुक्रवार को टेस्ट ड्राइव के दौरान हुए भयानक हादसे में एक इंजीनियर की मौत के लिए जिम्मेदार तेज रफ्तार वाहनों के लिए अलग से ट्रैक का प्रावधान नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों की माने तो ड्रंकन ड्राइविंग या लाइसेंस के बगैर कार चलाने की स्थिति में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई सख्त होती । हालांकि, अभी भी आरोपी की सजा, गवाहों के बयान पर निर्भर है। 25 दिसंबर को निर्वाणा कंट्री के पास सड़क पर हुए हादसे में मर्चेंट नेवी के चीफ इंजीनियर की मौत के मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया।


पुलिस ने इस मामले में पहले अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अगली सुबह, आरोपी खुद पुलिस के सामने पेश हो गया और मौके का फायदा उठाते हुए उसे आनन-फानन में अदालत में पेश कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के वक्त कार की स्पीड 135 किलोमीटर से अधिक थी, लेकिन कानून के तहत कार कंपनी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। आरोपी संजीव मित्तल को जमानत मिलने के बाद पुलिस की जांच और भी धीमी हो गई। कानूनी सलाहकार संतोख सिंह बताते हैं कि टेस्ट ड्राइव के दौरान, अगर हादसे में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो इसके लिए वाहन चलाने वाला ही आरोपी है। उन्होंने कहा कि अगर वाहन चलाने वाले शराब पी रखी है या उसके पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस ना हो तो उसे आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोपी बनाया जाएगा। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी मिल सकती है। इस दुर्घटना में पुलिस ने गवाहों के बयान लेने शुरू किए हैं, लेकिन अभी भी दो पीड़ित हैं जिनकी गवाही से आरोपी के खिलाफ दूसरी कार्रवाई हो सकती है।

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