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घंटियां बजाकर जलवायु परिवर्तन रोकने की कोशिश

कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर विश्व सम्मेलन विफल रहा और दुनियाभर के नेता इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए कई दिन तक माथापच्ची करते रहे, लेकिन डेनमार्क ने अपनी तरह के एक अनूठे उपाय के तौर पर जलवायु बदलाव रोकने के प्रयासों के तहत देशभर के गिरिजाघरों में घंटियां बजाई। इसी तरह की कुछ अन्य मजेदार घटनाएं बीते बरस की थाती रहीं।

13 दिसंबर को डेनमार्क के चर्च में 350 बार घंटियां बजायी गयीं क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा में कार्बन डाई आक्साइड का सुरक्षित स्तर 350 होना चाहिए।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी को भारत सहित दुनियाभर में पढ़ने पढ़ाने वालों के पसंदीदा और प्रतिष्ठित संस्थान के तौर पर देखा जाता है। यहां सैकड़ों वर्षों से लगी कुछ ऐतिहासिक घंटियों को इस साल आठ जुलाई को बदल दिया गया। कैम्ब्रिज की 800वीं सालगिरह के मौके पर यूनिवर्सिटी के ग्रेट सेंट मेरी चर्च में पुरानी घंटियों के स्थान पर 12 नई घंटियां लगाई गईं।

पिछले तीन सौ सालों से लगातार इस्तेमाल की जा रही इन घंटियों को कई वजहों से बदलने की जरूरत महसूस हुई। दरअसल बनावट की मुश्किलों और चर्च की मीनार के झुकने के कारण इन घंटियों के बजने में दिक्कत हो रही थी।

बीस मई को अंतरिक्षयात्रियों ने अंतरिक्ष स्टेशन में मूत्र, पसीने और सांस से छोड़ी गयी वायु के संनन से तैयार पुन:चक्रित पेयजल का उपयोग किया।

अमेरिकी अंतरिक्षयात्री माइकल बरात के अनुसार, पेयजल पर लेबल लगा था इसे तभी पियो जब वास्तविक पेयजल 200 मील से भी दूर हो। चांद और मंगल पर स्थित स्टेशनों के अंतरिक्षयात्रियों के लिए मूत्र पुन:चक्रण प्रणाली एक अदद जरूरत थी।

क्यूबा को आर्थिक मंदी और पिछले 50 सालों से आर्थिक प्रतिबंध झेलने के कारण इस साल टॉयलेट पेपर की किल्लत से दो चार होना पड़ा। टॉयलेट पेपर बनाने वाली सरकारी कंपनी क्लाइमेक्स ने आगाह किया कि वैश्विक आर्थिक मंदी और विभिन्न विनाशकारी चक्रवातों के कारण उसके उत्पादन पर असर पड़ा है और वह साल के अंत तक उपयुक्त मात्रा में टॉयलेट पेपर आयात करने की स्थिति में नहीं आ पायेगी।

जुलाई माह में लंदन में लगे 245 साल पुराने पेड़ की विरासत को बचाने के लिए इसे एक स्थान से उखाड़ कर दूसरे स्थान पर लगाया गया। ऐसेफेलारटोस आल्टेंस्टेनिनी साइकड प्रजाति का यह पेड़ 1779 के दशक की शुरूआत में दक्षिण अफ्रीका के ईस्टर्न केप से लाया गया था। यह पेड़ महान खोजकर्ता कैप्टन जेम्स कुक की समुद्री यात्राओं की निशानियों में से एक माना जाता है। एक टन वजनी इस पेड़ को दोबारा लगाने के लिए नौ मजदूर, एक क्रेन और तीन माह का समय लगा।

एक हल्के विमान से दुल्हन के गुलदस्ते को हवा में बिखेरना मंहगा पड़ा। 11 जुलाई को फूलों का यह गुलदस्ता हवा में लहरा कर फेंकने के बाद विमान के रोटर में जा फंसा और इंजन जाम हो गया। विमान को एक छात्रावास के उपर उतारना पड़ा। दुर्घटना में पायलट मामूली रूप से जख्मी हो गया। यह कारनामा करने वाले यात्रियों की कई हडिडयां टूट गई। दुल्हा, दुल्हन विमान में मौजूद नहीं थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के सशस्त्र बलों की स्वीटहार्ट कही जाने वाली सबसे उम्रदराज जीवित गायिका 92 वर्षीय डेम वेरा लिन को ब्रिटेन के 20 सर्वाधिक लोकप्रिय एलबमों की सूची में इस साल फिर से स्थान मिल गया। लिन विश्व युद्ध के दौरान लाखों दिलों की धड़कन थीं जिनके गीतों को युद्धरत सैनिक बड़े चाव से सुना करते थे। लिन का एलबम वी विल मीट अगेन द वेरी बेस्ट ऑफ वेरा लिन अगस्त के अंतिम सप्ताह में द्वितीय विश्व युद्ध की 70वीं बरसी पर रिलीज किया गया जिसमें लिन के स्वर्णिम दिनों के 24 गीत हैं।

ताजा गणना के तहत इस साल शनि ग्रह के एक दिन की अवधि में पांच मिनट की कमी आ गई। शनि को अब अपनी कक्षा का एक चक्कर लगाने में 10 घंटे, 34 मिनट और 13 सेकेंड लगते हैं। यह अवधि पूर्व में पता लगाई गई मीयाद के मुकाबले पांच मिनट कम है।

यदि आधी सदी पर नजर डाली जाए तो जुलाई में जापान के कई हिस्सों में इस साल सूरज की सबसे कम रोशनी दर्ज की गई। जापान की मौसम एजेंसी का कहना है कि जापान के समुद्र से लगते होक्काइदो और तोहोकु शहर में जुलाई के महीने में सूरज की रोशनी वार्षिक औसत की 54 प्रतिशत रही। यह 1946 के बाद सबसे कम रोशनी है।

बर्मा के लोगों ने पवित्र बौद्ध पैगोडा को जाने वाले मार्ग की मरम्मत के लिए 1750 पाउंड बाल दान किए। मांडले शहर और नजदीकी शहरों की 30 हजार महिलाओं और 100 से अधिक पुरषों ने बाल दान किये हैं।

आलुंगदा कथापा पैगोडा की देखरेख करने वाले बौद्ध भिक्षु बाल की बिक्री से मिलने वाली राशि का उपयोग मार्ग की मरम्मत तथा लोकप्रिय तीर्थस्थल तक जाने के लिए पुलों के निर्माण में करेंगे।

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