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पिछले साल जो हुआ पहली बार..

बीते बरस में चंद्रमा पर पानी की खोज, अमेरिका में अश्वेत राष्ट्रपति का चुनाव और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की सुखोई में उड़ान जैसी बड़ी और अपने तरह की पहली घटनाओं की सुर्खियों के बीच कुछ ऐसी अनूठी बातें भी पहली बार हुईं, जो आने वाले वर्षों में एक मिसाल बनकर रहेंगी। आने वाले समय में भी इस बरस पहली बार हुई इन घटनाओं को याद जरूर किया जाएगा।

प्रतिभा की उड़ान
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 25 नवंबर को सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से उड़ान भर कर अपने नाम एक रिकॉर्ड दर्ज करा लिया। रूस निर्मित सुखोई में 30 मिनट की उड़ान भर कर प्रतिभा पाटिल ऐसा करने वाली किसी भी देश की पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष बन गईं। 74 वर्षीय प्रतिभा ने किसी भी युद्धक विमान में 30 मिनट की यात्रा करने वाली सबसे उम्रदराज महिला का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
 
चंद्रयान-1 ने ढूंढा पानी
पिछले साल 22 अक्टूबर, 2008 को चंद्रमा के रहस्य सुलझाने के लिए भारत द्वारा प्रक्षेपित पहले मानवरहित मिशन चंद्रयान-1 ने पृथ्वी के इकलौते उपग्रह पर इस साल पानी की खोज कर भारत के खाते में एक और उपलब्धि दर्ज करा दी।

चंद्रयान-1 के साथ भेजे गए नासा के उपकरण मून मिनरलोजी मैपर (एम-3) ने चंद्रयान-1 द्वारा जुटाए गए विवरण का विश्लेषण कर चंद्रमा पर पानी के अस्तित्व की पुष्टि कर दी। इस खोज ने चार दशक से चले आ रहे इन कयासों पर विराम लगा दिया कि चंद्रमा पर पानी है या नहीं।

ओबामा बने पहले अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिका के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए बराक ओबामा ने 20 जनवरी को देश के 44वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह करिश्माई डेमोक्रेट नेता अमेरिका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति है।

तिरुपति के लड्डू का कॉपीराइट
आंध्र प्रदेश में भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में भक्तजनों को दिए जाने वाले तिरुपति लड्डू को भौगोलिक कॉपीराइट प्रदान किया जाना इस वर्ष की एक अनूठी घटना रही। अब अन्य कोई भी इसी नाम से लड्डू न तो बना सकेगा और न ही इसकी मार्केटिंग कर सकेगा।

तिरमाला पहाड़ी पर वेंकटेश्वर मंदिर की देख-रेख करने वाले ट्रस्ट तिरमाला-तिरुपति देवस्थानम ने पिछले साल मार्च में चेन्नई स्थित जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री में लड्डू के भौगोलिक कॉपीराइट के लिए आवेदन किया था और सितंबर में उसे यह अधिकार मिल गया।

तिरुपति के लड्डू और दाजिर्लिंग की चाय के साथ-साथ जीआई तमगा बनारसी साड़ियों को भी मिल गया। उम्दा गुणवत्ता एवं बुनाई के लिए प्रसिद्ध बनारसी साड़ियां सितंबर में विशिष्ट भौगोलिक पहचान (जीआई) का दर्जा मिलने के साथ ही कई संरक्षित वस्तुओं की सूची में शामिल हो गईं।

गंगा की डॉल्फिन बनी राष्ट्रीय जीव
कुदरत की सबसे खूबसूरत कलाकृतियों को राष्ट्रीय चिह्न का दर्जा देकर उनके संरक्षण को बढ़ावा देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने गंगा की डॉल्फिन को इस साल राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर दिया। यह पहला मौका है जब किसी जलचर को राष्ट्रीय जीव घोषित किया गया है।

सितंबर माह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई गंगा नदी घाटी प्राधिकरण की बैठक में लुप्तप्राय: गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित करने का निर्णय किया गया।

दरअसल गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने और बढ़ते प्रदूषण के कारण यह खूबसूरत प्राणी अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत है। हालत यह है कि आज 2000 से भी कम गंगा डॉल्फिन बची हैं। यह अनूठी डॉल्फिन दृष्टिहीन है और केवल अपने सूंघने की शक्ति से अपना जीवन बसर करती है।

व्हाइट हाउस में गुरुपर्व और दीपावली
अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों के योगदान को अक्सर काफी सराहना मिलती रही है। लेकिन राष्ट्रपति ओबामा पर भारत का रंग गहरा चढ़े होने की झलक तब साफ दिखाई दी, जब इस वर्ष व्हाइट हाउस में पहली बार प्रकाश का त्योहार दीपावली और गुरुनानक देव का जन्मदिन गुरुपर्व के रूप में धूमधाम से बनाया गया।

इस मौके पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पाठियों ने मनोहर प्रस्तुति दी और समारोह में पूरे अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों ने भाग लिया। व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ पब्लिक इंगेजमेंट द्वारा आयोजित यह समारोह राष्ट्रपति ओबामा की खास पहल पर हुआ।   

अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस
दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला द्वारा शांति के क्षेत्र में दिए योगदान का सम्मान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार 18 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस घोषित कर दिया। विश्व संस्था की 192 सदस्यीय महासभा में इस संबंध में 11 नवंबर को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत 2010 से हर साल इस दिन को अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
   
दक्षिण अफ्रीका के 1994 से 1999 तक राष्ट्रपति रहे मंडेला आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों और अन्य वैश्विक मुद्दों पर लोगों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

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