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जाएं तो जाएं कहां

जाएं तो जाएं कहां

दिल्ली-एनसीआर में स्थित अधिकांश नाइट क्लबों में ‘नो स्टैग एंट्री’ की पॉलिसी है। यही कारण है कि जो पुरुष अकेले हैं यानी उनकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है तो उनके लिए इन क्लबों में जाना आसान नहीं होता।  कहा जा सकता है कि यह भेदभाव है, क्योंकि यदि कोई लड़की अकेली है तो उसे इन जगहों पर जाने की इजाजत अकेले होने के बावजूद भी मिल जाती है।

इस बारे में एफ बार एंड लाउंज की सीईओ दीपाली नरूला कहती हैं, ‘हम स्टैग को प्रोत्साहन नहीं देते। हां, किसी कपल के साथ हम एक या दो अकेले लड़के को पार्टी एन्जॉय करने की इजाजत जरूर दे देते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि लड़के और लड़कियों का अनुपात बराबर बना रहे, ताकि किसी तरह की कोई समस्या न आए।’ इसी सिलसिले में प्योर बाई कूकी की डाइरेक्टर रुम्मी शर्मा कहती हैं, ‘स्टैग को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जाती, लेकिन जो नियमित आते हैं, उनको खास परिस्थितियों में अंदर जाने दिया जाता है।’

अब यहीं से बहस का सिलसिला शुरू हो जाता है। ‘ऐसा नहीं है कि सभी अकेले लड़के नाइटक्लब में परेशानी ही पैदा करते हैं।’ पूछते हैं मोहसिन खान, जिन्हें हाल ही में अकेले होने के कारण एक नाइटक्लब में जाने की इजाजत नहीं मिली थी। ‘क्या आपको नहीं पता है कि लड़के ज्यादा ड्रिंक करने के बाद कितनी परेशानियां पैदा करते हैं?’ कहती हैं एलिवेट की प्रवक्ता तरीना शाह। इस पर मीडिया कंसल्टेंट मधोक सिंह कहते हैं, ‘क्या ड्रिंक करने के बाद लड़कियां गड़बड़ी नहीं कर सकतीं? इस भेदभाव का सच में तो कोई आधार नहीं है।’

जो भी हो, पार्टियों का मौसम है और स्थिति फिलहाल यही है कि किसी भी नाइटक्लब और डिस्कोथेक में स्टैग का जाना सामान्य ढंग से संभव नहीं है। ऐसे में या तो साथी की तलाश करनी होगी या किसी कपल के साथ जाना होगा।

कुछ ठिकाने जरूर ऐसे हैं, जहां जाकर स्टैग पार्टी का लुत्फ उठा सकते हैं। कुछ नाम हैं- लिजार्ड लाउंज (साउथ एक्स.), स्टेइंग अलाइव, एड मेकर (गुड़गांव), एमिगोज, वेलोसिटी (जीके) आदि। तो फिर निराश न हों! 

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